प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। पहले दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख तय थी, जिसे अब बढ़ाकर 6 मार्च कर दिया गया है। इसके साथ ही मैपिंग से जुड़े सभी नोटिसों की प्रक्रिया की समयसीमा भी आगे बढ़ा दी गई है। अब अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी।
शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जानकारी दी कि फार्म-6 के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही मैपिंग से जुड़ी विसंगतियों को लेकर भारी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस और आवेदनों की संख्या अधिक होने के चलते राजनीतिक दलों की ओर से समय बढ़ाने की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं, जिनके नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे। यही वजह है कि फार्म-6 के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं। एक माह की अवधि में, 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच 16 लाख से अधिक फार्म-6 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब तक कुल 37 लाख 80 हजार 414 आवेदन जमा किए जा चुके हैं।
SIR: 2.37 करोड़ नोटिस जनरेट
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में तार्किक विसंगतियों के कई मामले सामने आए हैं। कहीं पिता के नाम में अंतर पाया गया है, तो कहीं पिता और पुत्र की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्ज है। ऐसे मामलों में कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं (SIR) को नोटिस भेजे जाने हैं, जिनमें से अब तक 2.37 करोड़ नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश में रह रहे भारतीय नागरिक फार्म-6A भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
वहीं फार्म-7 को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए नवदीप रिणवा ने कहा कि इस संबंध में सभी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि फार्म-7 का उपयोग केवल किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची (SIR) से हटाने के लिए किया जाता है और इसके लिए आवेदनकर्ता को अपना वोटर आईडी कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
फिलहाल निर्वाचन विभाग पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है और निर्धारित समयसीमा के भीतर संशोधित मतदाता सूची जारी करने की तैयारी कर रहा है।

