Sonbhadra: बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार की पुलिस व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब पांच वर्ष पहले अपहरण की गई 19 वर्षीय युवती का आज तक कोई पता नहीं चल सका। मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सदर कोतवाल और क्षेत्राधिकारी को तलब किया है। साथ ही प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित कर युवती की बरामदगी का भरोसा मांगा है।
Sonbhadra: पुलिस ने सिर्फ निभाई औपचारिकता
प्राप्त जानकारी के अनुसार भाटौलिया तेंदू गांव निवासी धर्मशीला मौर्य की 19 वर्षीय बेटी 16 फरवरी 2020 को दिन में घर से निकली थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा सूचना देने पर पुलिस ने शुरुआत में केवल गुमशुदगी दर्ज कर औपचारिकता निभाई। बाद में पीड़िता (Sonbhadra:) की मां को जानकारी मिली कि उसकी बेटी का अपहरण वंशराज और वीरेश कुमार यादव उर्फ मोहन यादव द्वारा स्कॉर्पियो वाहन से किया गया है, इसके बावजूद पुलिस ने तत्काल अपहरण का मुकदमा दर्ज नहीं किया।
लगातार थानों और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद लगभग तीन वर्ष बाद 6 अगस्त 2023 को अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद भी पुलिस (Sonbhadra:) ने युवती की बरामदगी किए बिना ही जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल कर दी। दोनों आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
बताया गया कि मुकदमे की पैरवी कर रही पीड़िता की मां पर कई बार हमले भी किए गए, जिसकी रिपोर्ट रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में दर्ज है, लेकिन अब तक उन्हें कोई सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। सीएडब्ल्यू कोर्ट द्वारा टीम गठित करने के आदेश के बावजूद पुलिस (Sonbhadra:) की निष्क्रियता बनी रही। अधिवक्ता संतोष दुबे द्वारा मामला उच्च न्यायालय में उठाए जाने के बाद कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया।
सुनवाई के दौरान एसआईटी गठन और युवती की बरामदगी का आश्वासन दिया गया।हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2026 की तिथि तय की है। पीड़िता की मां की उम्मीद अब न्यायालय के आदेश और कार्रवाई पर टिकी हुई है।

