Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्र का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस बार विशेष संयोग बना है कि चतुर्थी तिथि लगातार दो दिन—25 और 26 सितंबर तक रहेगी। ऐसे में नवरात्रि की अवधि नौ नहीं, बल्कि दस दिनों की होगी।
मान्यता है कि मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा (कद्दू) अत्यंत प्रिय है। भक्तजन इस दिन उन्हें कद्दू के पेठे का भोग अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
Shardiya Navratri: ये है मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर घनघोर अंधकार व्याप्त था, तभी मां कूष्मांडा (Shardiya Navratri) ने प्रकट होकर अपने दिव्य स्मित से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें ‘कूष्मांडा’ नाम मिला। उन्हें आदिशक्ति और आदिस्वरूपा भी कहा जाता है। मां का निवास सूर्यलोक में माना गया है, जहां किसी अन्य देवी-देवता का तेज नहीं ठहर पाता।
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, मां कूष्मांडा की आराधना से नई शुरुआत में सफलता मिलती है। जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेषकर वे लोग जो किसी नए कार्य का शुभारंभ करने जा रहे हैं, उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मां कूष्मांडा (Shardiya Navratri) का संदेश है कि मुस्कान और सकारात्मक सोच से हर कठिनाई पर विजय प्राप्त की जा सकती है। उनकी आराधना से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है और सफलता का मार्ग सरल हो जाता है।

