- दर्शनार्थियों के लिए मैदागिन और गोदौलिया से चलेगा ई-रिक्शा
- काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में रखा गया प्रस्ताव
- विश्वनाथ मंदिर का अपना होगा धार्मिक और सांस्कृतिक कैलेंडर
राधेश्याम कमल
वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की 104वीं बोर्ड बुधवार को मंडल आयुक्त सभागार में हुई बैठक में कई निर्णय लिये गये। इसमें अब मंगला आरती का टिकट 500 रु. करने का निर्णय लिया गया। बैठक में न्यास अध्यक्ष प्रो नागेंद्र पांडेय, मंडलायुक्त कौशलराज शर्मा, जिलाधिकारी एस राजलिंगम, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.हरेराम त्रिपाठी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ सुनील वर्मा मंदिर के ट्रस्टी चंद्रमौली उपाध्याय, पं दीपक प्रसाद मालवीय, पं प्रसाद, दीक्षित, वेंकट रमन, प्रो. बृजभूषण ओझा उपस्थित रहे। बैठक में मंदिर न्यास के सदस्यों ने मैदागिन और गोदौलिया पर वाहनों को रोक दिया जाने के कारण दर्शनार्थियों को मंदिर तक पहुंचने में घोर असुविधा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मंदिर की ओर से पहल करते हुए या कार्य कराया जाए। इस पर न्यास के सदस्य सहित सभी अधिकारियों ने इसकी फीजिबिलिटी चेक करा कर नगर निगम या यातायात विभाग को यह कार्य कराने में सहयोग करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ।

बोर्ड की ओर से काशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे वर्ष केलिए धार्मिक और सांकृतिक आयोजन किए जाने के लिए कैलेंडर तैयार करने के लिए गठित कमेटी के समन्वय से बनाये जाने हेतु निर्णय लिया गया। एक आंतरिक संमिति का गठन कर ट्रस्ट की डायरी मार्च माह में छपवाने की तैयारी करने का निर्णय लिया गया। मंदिर में बढ़ते श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए टिकट के दामों में भी बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इस बैठक के अनुसार अब मंगला आरती का टिकट 350 की जगह 500 में वही सप्त ऋषि आरती श्रृंगार भोग आरती मध्यान भोग आरती का टिकट 180 की जगह 300 करने का प्रस्ताव पास हो गया, जो एक मार्च से लागू की जायेगी।
मंदिर के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडे ने कहा कि मंदिर की गरिमा और व्यवस्था सुधारने में मंदिर के अधिकारियों के साथ-साथ ट्रस्ट के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री सुनील कुमार वर्मा ने वर्ष 2022 230 के लिए कुल 105 करोड़ की आए और 40 करोड़ के खर्च का लक्ष्य रखा गया है। बोर्ड द्वारा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं संपूणार्नंद संस्कृति विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर के समस्त पाठ्यक्रम में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्राओं को 10,000 को एकमुश्त वार्षिक छात्रवृत्ति दिये जाने का निर्णय लिया गया।

