Varanasi: वाराणसी की गलियों में आज कुछ बदला-बदला सा एहसास था। सुबह जब लोग घरों से निकले, तो धुंध और कंपकंपाती ठंड की जगह चटख धूप ने उनका स्वागत किया। बीते कई दिनों से गलन और सिहरन से जूझ रही काशी के लिए यह किसी राहत भरी सांस से कम नहीं थी। घाटों पर बैठे साधु-संत, चाय की दुकानों पर जुटे लोग, और स्कूल जाते बच्चे—सब धूप की गरमाहट को अपने चेहरे पर महसूस करते नजर आए।
मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने तापमान को भी ऊपर की ओर धकेल दिया। जहां कुछ दिन पहले अधिकतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट गया था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 24 डिग्री तक पहुंच गया है। लगभग 13 डिग्री की छलांग—यही वजह है कि दिन में हल्की-सी गर्माहट महसूस हो रही है और लोग लंबे समय बाद खुले आसमान के नीचे धूप का आनंद ले पा रहे हैं।
Varanasi: धूप की चादर, ठंड की गिरफ्त से थोड़ी राहत
सुबह-शाम की तीखी ठंड में भी फिलहाल कुछ नरमी आई है। गलन कम हुई है, और हाथ-पैर सुन्न कर देने वाली सर्द हवाएं कुछ देर के लिए मानो थम गई हों। बाजारों (Varanasi) में रौनक लौटती दिखी, रिक्शा-ऑटो वालों की आवाजाही बढ़ी, और घाटों पर बैठकर धूप सेकते लोगों की कतारें इस बात की गवाही दे रही थीं कि काशी ने ठंड से एक छोटा-सा ब्रेक ले लिया है।
लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। मौसम विज्ञान की भाषा में इसे एक “अंतराल” कहा जा सकता है—एक ऐसा विराम, जिसके बाद ठंड अपनी पूरी ताकत के साथ वापस लौटने को तैयार है।
पहाड़ों से उठती ठंड की कहानी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी जो धूप और गर्माहट दिख रही है, वह मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने का नतीजा है। लेकिन यही पश्चिमी विक्षोभ जब पूरी तरह गुजर जाएगा, तो उत्तर-पश्चिम से ठंडी हवाएं दोबारा मैदानों (Varanasi) की ओर रुख करेंगी।
15 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने वाला है। इसका असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश—यानी काशी (Varanasi) समेत आसपास के इलाकों में भी महसूस किया जाएगा। आसमान में बादलों की आवाजाही, पछुआ हवाओं की वापसी और तापमान में गिरावट—ये सभी संकेत हैं कि ठंड अभी अपनी आखिरी चाल चलना बाकी रखती है।
24 घंटे में बदल सकता है मौसम का चेहरा
मौसम विभाग का आकलन है कि जैसे ही यह नया सिस्टम सक्रिय होगा और मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ेगा, हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिमी हो जाएगी। इसके साथ ही 24 घंटे के भीतर तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा सकती है।
न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है—यानी रातें फिर से सिहरन भरी होंगी और सुबह की ठंड दोबारा लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करेगी।
शीतलहर की दस्तक
मौसम वैज्ञानिक इस बात से भी इनकार नहीं कर रहे कि कुछ इलाकों में शीतलहर जैसी स्थिति बन सकती है। खासकर खुले और ग्रामीण क्षेत्रों में ठंडी हवाएं ज्यादा तीखी असर डाल सकती हैं। इसका मतलब है कि अभी जो धूप की राहत मिली है, वह आने वाले दिनों की कड़ाके की ठंड के लिए बस एक “तैयारी का समय” भर हो सकता है।
वाराणसी जैसे शहर में मौसम का हर उतार-चढ़ाव सीधे जनजीवन को छूता है। ठंड बढ़ने पर सुबह-सुबह गंगा स्नान (Varanasi)करने वालों की संख्या घट जाती है, लेकिन धूप निकलते ही घाटों पर फिर चहल-पहल लौट आती है। आज भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा—जहां कुछ दिन पहले लोग अलाव के पास दुबके रहते थे, वहीं आज वे धूप में बैठकर बातचीत करते नजर आए।
स्कूलों, दफ्तरों और बाजारों में भी इसका असर दिखा। ठंड कम होने से लोगों की आवाजाही बढ़ी, लेकिन मौसम विभाग (Varanasi)की चेतावनी ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि सर्दी अभी खत्म नहीं हुई है।

