Chaitra Navratri की शुरुआत इस वर्ष 19 मार्च के मध्य से हो चुकी है। इसके साथ ही आस्था, श्रद्धा और भक्ति का माहौल पूरे देश में देखने को मिल रहा है। खासतौर पर पूर्वांचल-यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार-में इस पर्व का विशेष महत्व है। यहां नवरात्रि देवी शक्ति के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं, घर-घर में घट स्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू हो चुकी है।
लोग व्रत रखकर, भजन-कीर्तन कर और विधि-विधान से पूजा कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करने में जुटे हैं। पूरे माहौल में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की झलक साफ देखी जा सकती है।
तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के तीसरे दिन (Chaitra Navratri) मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र की आकृति घंटा के रूप में विराजमान होती है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह रूप अत्यंत शांत और करुणामयी होने के साथ-साथ शत्रुओं का संहार करने वाला भी माना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में साहस व आत्मविश्वास बढ़ता है।
Chaitra Navratri: मंदिरों में उमड़ती भीड़
वहीं वाराणसी में नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह से ही मंदिरों (Chaitra Navratri) में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। खासतौर पर दुर्गाकुंड मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। भक्त मां के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन चेहरे पर आस्था और भक्ति की चमक साफ नजर आती है। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है, वहीं भजन-कीर्तन और आरती से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है।
पूजा विधि और विशेष मान्यता
इस दिन श्रद्धालु पीले या लाल वस्त्र पहनकर मां की पूजा (Chaitra Navratri) करते हैं। मां को दूध, खीर और मिठाई का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कई लोग इस दिन विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवरात्रि के ये नौ दिन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और श्रद्धा का संदेश भी देते हैं। पूर्वांचल की आस्था में रची-बसी यह परंपरा हर साल लोगों को एक नई ऊर्जा और विश्वास से भर देती है।
जैसे-जैसे नवरात्रि आगे बढ़ती है, मंदिरों में भीड़ और उत्साह दोनों चरम पर पहुंच जाते हैं। अंत में कन्या पूजन और हवन के साथ यह पर्व पूर्ण होता है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और विश्वास हर भक्त के मन में हमेशा बना रहता है। यही इस आस्था के पर्व की सबसे बड़ी खासियत है।

