दिल्ली में UGC हेडक्वार्टर के बाहर आज माहौल गरम है। नए नियमों के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन सड़कों पर उतर आया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक इस विवाद की गूंज सुनाई दे रही है। इसी बीच सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करेगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय की कोशिश है कि बजट सत्र से पहले इस विवाद को शांत किया जाए। सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल तैयार करना है। भ्रम फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है।
UGC को लेकर विवाद की जड़
दरअसल, UGC ने 2026 में Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकना और समानता को बढ़ावा देना है। हर संस्थान में एक इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया है, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा। यह कमेटी शिकायतों का निपटारा करेगी और बराबरी का माहौल बनाने की जिम्मेदारी निभाएगी।
क्या कहते हैं आंकड़े
UGC की रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है। 2019-20 में जहां 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई। आयोग का कहना है कि यही आंकड़े नए नियमों की जरूरत को साबित करते हैं।
सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नियमों में केवल SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है, जबकि जनरल कैटेगरी को भेदभाव का शिकार मानने की कोई व्यवस्था नहीं है। विरोधियों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर सवर्ण छात्रों को झूठे आरोपों में फंसाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की दहलीज
विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने जल्द सुनवाई की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि ये नियम UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ हैं। अदालत में अब यह तय होगा कि नियमों का भविष्य क्या होगा।
विपक्ष इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश में है। सरकार का जोर है कि विपक्ष के आरोपों को तथ्यों से काटा जाए और यह दिखाया जाए कि नियमों का मकसद किसी वर्ग को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सभी के लिए सुरक्षित और समान वातावरण तैयार करना है।

