शिव और शक्ति के महामिलन का पर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को काशी (Varanasi) में अद्वितीय भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। बाबा विश्वनाथ की नगरी में तीन दिन पहले से ही विवाहोत्सव की रस्में आरंभ हो जाएंगी, जिनमें पूरी काशी महादेव के विवाह के रंग में सराबोर होगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय के अनुसार, इस बार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी को सायं 4:23 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी को सायं 5:10 बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि (Varanasi) का आयोजन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी में किया जाता है, इसलिए पुण्यकाल 15 फरवरी की रात्रि में ही प्राप्त होगा। इसी समय भक्तजन व्रत, पूजन और रात्रि जागरण कर शिव कृपा का लाभ उठाएंगे।
Varanasi: विवाहोत्सव की परंपरा
महाशिवरात्रि से पूर्व बाबा विश्वनाथ (Varanasi) के विवाह की संपूर्ण लोकाचारिक रस्में तीन दिन पहले से ही आरंभ हो जाती हैं। इस दौरान पूरी काशी विवाहोत्सव के रंग में डूब जाती है। महाशिवरात्रि की रात निकलने वाली अलौकिक शिव बरात की झांकी देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन का यह अवसर भक्तों के लिए जीवनभर की स्मृति बन जाता है।

धार्मिक और सामाजिक महत्व
महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और विविध पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। रात्रि जागरण के दौरान भक्ति गीतों की गूंज वातावरण को पवित्र बना देती है। शिव और शक्ति का यह मिलन जीवन में संतुलन और समर्पण का संदेश देता है।
भव्य आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
काशी (Varanasi) में महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिरों को भव्य सजावट से सजाया जाता है। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। इस दिन विशेष मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
महाशिवरात्रि पर काशी का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिरों की रौनक, श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति गीतों की गूंज इस पर्व को और भी खास बना देती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि काशी (Varanasi) की सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर करता है। महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है, जिसे हर भक्त अपने जीवन में संजोना चाहता है।

