UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन का माहौल गरमा गया। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी ने कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी को बड़ा मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोल दिया। सपा नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में “जहर का कारोबार” फल-फूल रहा है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ छोटे लोगों तक सीमित है, जबकि बड़े खिलाड़ी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
UP: कफ सिरप की शीशी का कट आउट लेकर पहुंचे सदन
सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर में सपा का विरोध प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बन गया। वाराणसी से सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा (UP) साइकिल पर कफ सिरप की शीशी का कटआउट लेकर पहुंचे। यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन सरकार की नीतियों पर तंज था। उन्होंने कहा, “पहले कालीन भइया की चर्चा होती थी, अब कोडीन भइया सामने आ गए हैं। लेकिन इन पर न तो कार्रवाई दिख रही है और न ही बुलडोजर।”
इसी कड़ी में शिकोहाबाद (UP) से सपा विधायक मुकेश वर्मा गले में पोस्टर लटकाकर विधानसभा पहुंचे। पोस्टर पर साफ शब्दों में लिखा था—“जहर का कारोबार बंद करो, दोषियों के घरों पर बुलडोजर चले।” विधायक वर्मा ने सदन के भीतर और बाहर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि कफ सिरप की काली कमाई में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों की भूमिका है, इसलिए असली दोषियों पर हाथ नहीं डाला जा रहा।
क्या है विपक्ष का आरोप
विपक्ष का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन केवल छोटी मछलियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि तस्करी के बड़े नेटवर्क और उसके सरगनाओं को संरक्षण मिल रहा है। सपा विधायक बृजेश यादव भी इस विरोध में शामिल हुए और सरकार से सवाल किया कि आखिर बुलडोजर कार्रवाई बड़े तस्करों पर कब चलेगी।
इस पूरे मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। अखिलेश यादव का दावा था कि हजारों करोड़ रुपये का अवैध कोडीन कफ सिरप रैकेट वाराणसी और आसपास के जिलों (UP) से संचालित होकर देश के बाहर तक फैला हुआ है। उन्होंने STF की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष नहीं दिख रही।
अखिलेश यादव ने मांग की कि इस मामले की जांच के लिए ईमानदार अधिकारियों की एक विशेष “सिरप टास्क फोर्स” बनाई जाए, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बुलडोजर की कार्रवाई चयनात्मक है और इसका सबसे ज्यादा असर PDA वर्ग—पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक—समुदायों पर पड़ रहा है, जबकि प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं।

