UP के उन्नाव के बीजेपी पूर्व विधायक और रेप, मर्डर के अपराधी कुलदीप सिंह सेंगर पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगा दी है। कोर्ट के अन्दर क्या हुआ? सुनवाई के दौरान के तर्क रखे गये, जजों ने क्या कहा जानते हैं आगे…
आपको बता दें कि कुलदीप सिंह (UP) पर दो मामले चल रहें हैं, जिसमे एक उन पर पीड़िता के पिता के हत्या का है, जिसे सिद्ध कर दिया गया है और उसे जेल की सजा भी हुई है। वहीं दूसरा केस पीड़िता के साथ रेप का है, बयान के मुताबिक इस मामले के दौरान वो नाबालिग थी। वहीं नाबालिग के साथ दुर्व्यहवार पर पोक्सो एक्ट के तहत सजा सुनाई जाती है।
UP:पोक्सो एक्ट से बरी
इस वारदात के दौरान कुलदीप सिंह विधायक (UP) थे, वहीं पोक्सो एक्ट के मुताबिक जब एक पब्लिक सर्वेंट ऐसे घृणित मामले में आपराधि पाया जाता है तो उसके साथ अलग कार्यवाही होती है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसम्बर को फैसला सुनते हुए कहा कि ये कोई बड़ा अपराध नहीं है क्योंकि हम कुलदीप सिंह को पब्लिक सर्वेंट नहीं मानते। जिसके बाद कुलदीप सिंह पर हत्या का आरोप और रेप का आरोप लगते हुए सजा सुनाई, लेकिन पोक्सो एक्ट से बरी कर दिया। जिससे उसकी सजा उम्र कैद से हट कर कुछ सालों की ही रह जाती।
CBI ने किया सुप्रीम कोर्ट में अपील
इस घृणित अपराध को देखते हुए CBI ने सुप्रीम कोर्ट में अपील फाइल किया। हांलाकि सुप्रीम कोर्ट में शीतकाल छुटटी चल रही है लेकिन इस केस के लिए एक विशेष बैठक किया गया जिसमे जजों ने मामले को सुना और फैसला दिया। जिसके बाद उन्होंने कहा कि हमारे जजों से कुछ गलती हुई है गलती इंसानों से ही होती है। साथ ही जनता द्वारा चुने जाने के बाद MLA ऐसा घृणित कार्य कर रहा है तो उसके लिए किसी भी तरह के छुट का प्रावधान नही होना चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के फैसले पर रोक लगा दी है।

