Varanasi: 7 अप्रैल 2026 वाराणसी के चर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट केस ने एक बार फिर अदालत में हलचल पैदा कर दी है। 24 साल पुराने इस जानलेवा हमले के मामले में ट्रायल ने रफ्तार पकड़ी तो पूर्व सांसद धनंजय सिंह खुद अदालत पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। अदालत (Varanasi) में हुई पेशी के दौरान उन्होंने न सिर्फ विरोधी पक्ष के गवाहों पर सवाल उठाए, बल्कि दोबारा जिरह की मांग कर पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

अदालत में हुई पेशी
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में धनंजय सिंह पेश हुए। इस दौरान आरोपी विधायक अभय सिंह की ओर से अधिवक्ताओं ने बहस रखी। वहीं धनंजय सिंह ने धारा 311 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल कर बचाव पक्ष के गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने साफ कहा कि गवाहों से पुनः जिरह जरूरी है, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 11 मार्च तय कर दी।
एलिबाई का दावा
मामले में पहले प्ली ऑफ एलीबाई से जुड़े गवाहों को तलब किया गया था। बीते सप्ताह डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाकर यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और उनकी जिरह पूरी हो चुकी है। इन गवाहों का दावा है कि घटना के समय अभय सिंह फैजाबाद के एक सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। अब अदालत (Varanasi) अन्य गवाहों को तलब कर मामले की परतें खोलने की तैयारी में है।
Varanasi: 2002 जब गोलियों से दहला नदेसर
पूरा मामला 4 अक्टूबर 2002 का है, जब धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी वाहन से वाराणसी (Varanasi) से जौनपुर लौट रहे थे। उस समय वे निर्दलीय विधायक थे। कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास अचानक बोलेरो सवार अभय सिंह और उनके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और चालक समेत कई लोग घायल हो गए। इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हमलावर मौके से फरार हो गए।
धनंजय सिंह ने अपनी तहरीर (Varanasi) में आरोप लगाया कि अभय सिंह से उनकी दुश्मनी छात्र जीवन से चली आ रही है। उन्होंने दावा किया कि अभय कई बार उनकी हत्या की कोशिश कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमलावरों को पहचान लिया था और अभय सिंह प्रदेश में आतंक का पर्याय है। उन पर रंगदारी वसूली और भाड़े पर हत्या कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए।
लंबित केस पर अदालत की सख्ती
यह मामला 24 वर्षों से न्यायालय में लंबित है और शहर के सबसे पुराने मामलों में शामिल है। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि अब साक्षियों की जिरह किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी। हालांकि अदालत ने मूल चिकित्सीय अभिलेख तलब करने की मांग खारिज कर दी, लेकिन गवाहों की पुनः जिरह की अनुमति दे दी है। यह संकेत है कि अदालत अब इस मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने के लिए गंभीर है।
हाईकोर्ट के आदेश से रुकी थी प्रक्रिया
इस केस की सुनवाई पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते अटकी रही। वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि सत्र परीक्षण संख्या 461/2003 के निस्तारण तक इस मामले में निर्णय न दिया जाए। 29 अगस्त 2025 को उस केस का फैसला आने के बाद अब इस मामले में फिर से बहस शुरू हो सकी है।
गैंगस्टर केस में आरोपियों को मिली राहत
इस प्रकरण से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में 29 अगस्त 2025 को अपर जिला जज सुशील खरवार की अदालत (Varanasi) ने संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। यह फैसला भी इस पूरे केस के घटनाक्रम को प्रभावित करता रहा है।
वाराणसी एमपी-एमएलए कोर्ट के इस सबसे पुराने मामलों में से एक अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। वर्षों की देरी, कानूनी पेचीदगियों और गवाहों के बदलते बयानों के बीच अब अदालत की सख्ती ने उम्मीद जगाई है कि इस बहुचर्चित शूटआउट केस में जल्द ही न्याय का अंतिम फैसला सामने आएगा।




