Varanasi: वाराणसी कमिश्नरेट की छवि कैंट थाने में तैनात एक दरोगा ने धूमिल की है। उक्त दरोगा वर्दी की आड़ में लूट का गिरोह चलाता था। उसने कमिश्नरेट में थानों और चौकी पर तैनाती के दौरान ही 4 शातिरों की टीम बनाई और स्पेशल क्राइम ब्रांच टीम बताकर हाईवे पर छापेमारी के नाम पर खुद लूट की वारदातें शुरू कर दी। दरोगा के दोस्त पहले रेकी करते थे, फिर दरोगा स्वयं छापेमारी के नाम पर माल पार कर देता था।
दरोगा ने इस बार वाराणसी-कोलकाता हाईवे पर हवाला का रूपया बताकर सर्राफा कारोबारी के कर्मचारी से साढ़े 42 लाख रुपए लूट लिए। सबसे बड़ी बात कि दरोगा ने इस घटना को अंजाम अपने क्षेत्र से 50 किमी दूर सैयदराजा चंदौली में दी। दरोगा को लगता था कि हवाला का पैसा होने के कारण कोई केस नहीं करेगा, लेकिन वह फंस गया। सर्विलांस की जांच में दरोगा अपने दो साथियों समेत क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया।
इस घटना में सबसे बड़ी बात यह निकल कर सामने आई है कि घटना 22 जून की है और इसमें केस 21 दिन बाद 13 जुलाई को दर्ज हुआ है। पीड़ित थाने का चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस घटना चंदौली का बताकर टरकाती रही। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा, तो रामनगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इस घटना को लेकर रामनगर थाना प्रभारी की भी भूमिका गंभीर सवालों के घेरे में है।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की स्पेशल टीम पिछले 40 घंटे से आरोपियों से पूछताछ में लगी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूछताछ में कई लूट की वारदातें सामने आई हैं। वहीँ दरोगा के दो अन्य साथियों की तलाश में भी पुलिस दबिश दे रही है। इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी फ़िलहाल चुप्पी साधे हुए हैं और जाँच पूरी होने के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने रामनगर थाने की सीसीटीवी फूटेज और कॉल डिटेल भी निकलवाई है।
Varanasi: सर्विलांस के जरिए नाम आया सामने
सर्राफा कारोबारी जयपाल कुमार के दो कर्मचारियों से लूट की जांच कर रही पुलिस की सर्विलांस टीम जब लोकेशन खंगाल रही थी, तो उनके हाथ एक नंबर लगा, जिसे ट्रेस करने पर दरोगा का नाम सामने आया, जो कि कैंट थाने के एक फेमस चौकी पर तैनात था।
वारदात में उठते सवालों के बीच पुलिस कमिश्नर ने अपनी स्पेशल टीम लगाई तो कहानी कुछ और ही निकली। टीम ने दरोगा की कुंडली खंगाली तो सुई उस पर जाकर रुक गई। बातचीत में दरोगा ने अपने काम के लिए जाने की बात कही लेकिन सही जवाब नहीं दे पाया।
रामनगर और सैयदराजा से लगातार ले रहा था अपडेट
उक्त दरोगा इतनी बड़ी लूट की घटना को अंजाम देने के बाद काफी सतर्क हो गया था। इतना ही नहीं, वह घटना के बाद रामनगर थाना और सैयदराजा थाने से लगातार अपडेट ले रहा था। उसने रामनगर थाने में केस के विवेचक से बात भी की, हालांकि केस में प्रगति न होने के कारण उसे अपडेट नहीं मिल सका।
वारदात के बाद दरोगा बड़ी रकम और व्यापारियों का मामला होने के चलते सतर्क था। वहीं घटना के बाद रामनगर और सैय्यदराजा थाने से लगातार अपडेट भी ले रहा था। उसने रामनगर थाने में केस के विवेचक से भी बात की, हालांकि केस में कोई प्रगति नहीं होने के कारण उसे अपडेट नहीं मिल सका।
पुलिस कमिश्नर की टीम 40 घंटे से कर रही पूछताछ
मामले की जानकारी के बाद सोमवार दोपहर को सीपी की टीम ने चौकी के बाहर दरोगा को बुलाया और कार में लेकर आवास पहुंची। सीपी की निगरानी में दरोगा से पूछताछ की गई, इसके बाद जोन के एक अफसर को बुलाया गया। सीपी ने जोन के राजपत्रित अधिकारी से दरोगा और उसके दोस्तों की पूरी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया, तब से लेकर लगभग 40 घंटे तक अनवरत पूछताछ और दरोगा के दो अन्य साथियों की तलाश जारी है।
सूत्रों की मानें तो आरोपी दरोगा का नेटवर्क काफी मजबूत है। उसके संपर्क पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हैं। पहल वह गोमती ज़ोन के प्रमुख थाने पर था, बाद में उसने अपना तबादला वरुणा ज़ोन में करवा लिया। इसके बाद दरोगा ने मौका पाते ही बड़ा हाथ मारा। एक झटके में ही 42.50 लाख की और ख़ामोश होकर अपनी ड्यूटी करता रहा।
वर्दी की आड़ में कर रहा था गिरोह संचालित
दरोगा वर्दी की आड़ में अपना गिरोह संचालित कर रहा था। पुलिस की जांच में उसके और भी लूट के कई केस सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की टीम को उसके मोबाइल से घटना से सम्बंधित फोटो, वीडियो सहित चैटिंग भी मिली है। वह वर्दी की हंक में इस तरह के अपराधों को अंजाम देता था। वर्दी पहनकर लूट करने वाले दरोगा ने वाराणसी कमिश्नरेट की छवि दागदार की है। जनता की सुरक्षा का दावा करने वाले पुलिस की छवि पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
ये है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, 22 जून की रात वाराणसी के नीचीबाग कूड़ाखाना गली निवासी सर्राफ कारोबारी जयपाल कुमार के दो कर्मचारी 93 लाख रुपये का पेमेंट लेकर वाराणसी से कोलकाता के लिए रवाना हुए। जयपाल ने दोनों कर्मचारी अविनाश और धनंजय को भुल्लनपुर से बस में बैठाया और खुद घर आ गए। कुछ देर बाद कर्मचारी ने फोन कर कहा कि पुलिस ने कैश पकड़ लिया है और बताया कि क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम 42.50 लाख रुपये लेकर गई है। हम दोनों को बस से उतार दिया है। सर्राफ ने सोना खरीद के लिए जा रही धनराशि के दस्तावेज साथ होने की बात कही, लेकिन तब तक कार सवार जा चुके थे।
कर्मचारी ही बने थे आरोपी
सूचना पर सर्राफा कारोबारी आनन फानन में सैयदराजा पहुंचे तो पुलिस ने ऐसी किसी कार्रवाई से इंकार किया। मामले में दोनों कर्मचारियों को आरोपी मानते हुए कारोबारी ने तहरीर दी, पुलिस ने पूछताछ भी की लेकिन कुछ खास पता नहीं चला।
दोनों कर्मचारियों ने बताया कि वाराणसी कोलकाता हाईवे पर पहुंचने पर बस में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में और दो व्यक्ति सादे कपड़े में चढ़े। तीनों ने खुद को चंदौली जिले के सैयदराजा थाना की क्राइम टीम की पुलिस बताया।
इसके बाद तीनों बैग के साथ कर्मचारी अविनाश और धनंजय को नीचे उतारकर बस रवाना कर दी और उन्हें बिना नंबर प्लेट की कार में बैठा लिया। अविनाश का मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया, फिर दोनों को रोककर पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की।
दोनों को डरा सहमाकर कर उसके बैंग से 42 लाख 50 हजार रुपए ले लिए और बनारस रवाना हो गए। दरोगा ने अपने दो साथियों को बड़ागांव तक छोड़ा इसके बाद तीसरे को कैंट क्षेत्र में छोड़कर नगदी लेकर कमरे पर जाकर सो गया।
रामनगर थाने में केस की जारी है विवेचना
अविनाश गुप्ता और धनंजय यादव ने 42 लाख 50 हजार रुपए के छीने जाने की सूची देर रात लगभग 1:30 बजे मालिक को दी। जयपाल कुमार ने कटरिया बॉर्डर स्थित बनारस ढाबा पहुंचे। अविनाश ने जयपाल कुमार को बताया कि पुलिस वाले 50 लाख 50 हजार रुपए छोड़ दिए हैं। 42 लाख 50 हजार रुपए वह अपने साथ ले गए हैं।
Highlights
घटनास्थल को लेकर असमंजस में थे और 22 जून को घटना के कई दिन बाद में उन्होंने रामनगर थाने में तहरीर दी। बाद में घटनास्थल चंदौली जिले का चंदरखा निकला, जांच चंदौली पुलिस को हस्तांतरित कर दी गई। तब सर्राफ का आरोप था कि अविनाश गुप्ता और धनंजय यादव ने ही उनके 42.50 लाख रुपए गायब किए हैं।