Varanasi: पिण्डरा तहसील में न्यायिक अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाहियों को लेकर अधिवक्ताओं ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। वाराणसी के कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने यह मांग की है कि ग्राम न्यायालय पिण्डरा में मूलभूत व्यवस्थाएं जैसे मुन्सरिम की नियुक्ति और नकल विभाग का संचालन नहीं होने के कारण वादकारी व अधिवक्ताओं को न्यायालय मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे उन्हें असुविधा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसका जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि तहसील में तहसीलदार का पद खली है तथा नायब तहसीलदारों के लिए कोर्ट कक्ष तक उपलब्ध नहीं हैं। धारा 24, 32, 34/35 और 38 आदि के अंतर्गत कार्यवाही में भारी अनियमितताएं पाई जा रही हैं।
Varanasi: भ्रष्टाचार और पक्षपातपूर्ण निर्णय का लगाया आरोप
अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी (न्यायिक) पर भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण निर्णय और सुनवाई से पहले ही आदेश सुरक्षित रखने का आरोप लगाया है। साथ ही साथ उनका यह भी आरोप रहा कि बिना सुनवाई के मामलों का निस्तारण कर दिया जाता है और पत्रावलियों की अदालती जानकारी तक नहीं दी जाती। इस पूरे प्रकरण (Varanasi) में अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी और न्यायिक अधिकारी का तत्काल स्थानांतरण करके एक ईमानदार अधिकारी के नियुक्ति की मांग की है, ताकि न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता आए और भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।
वहीं अधिवक्ताओं (Varanasi) का कहना है कि इन अधिकारियों के अधीन लेखपालों और कानूनगो द्वारा रिश्वत लेकर रिपोर्ट बनाई जाती है और पैसा न देने पर पत्रावली में त्रुटि निकालकर उसे खारिज कर दिया जाता है।