Varanasi: काशी की पवित्र धरती पर सोमवार को आस्था और भावनाओं का वह संगम देखने को मिला, जो चारों ओर चर्चा का विषय बन बैठा और इस वाकया ने यह साबित कर दिया है कि धर्म चाहे कोई भी हो मन की भावना ही सर्वोपरि है। मां गंगा के तट पर मध्य प्रदेश के सागर निवासी असद खान ने सनातन धर्म को सिर्फ अपनाया ही नहीं बल्कि घर वापसी भी की।

21 ब्राह्मणों ने किए वैदिक मंत्रोचार
बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं के अत्याचार से आहत होकर असद ने ऐसा कदम उठाया। अस्सी घाट पर नाव से गंगा के बीच हुए वैदिक अनुष्ठान में असद खान ने सनातन धर्म को अपनाते हुए शुद्धिकरण और नामकरण संस्कार के बाद नया नाम अथर्व त्यागी स्वीकार किया। यह अनुष्ठान 21 ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार (Varanasi) के बीच संपन्न हुआ।

बता दें कि घर वापसी से पहले उनका शुद्धिकरण किया गया, फिर नामकरण संस्कार के दौरान उनका नया नाम रखा गया ‘अथर्व त्यागी’। हवन (Varanasi) के बाद उन्होंने गंगा के समक्ष संकल्प लिया कि अब वे सनातन परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत करेंगे।
Varanasi: नामकरण प्रक्रिया के बाद स्वीकारा धर्म
पूजन कराने वाले योगी आलोक ने बताया कि पहले शुद्धि-विधि की गई, फिर हवन और नामकरण के साथ विधिवत धर्म-स्वीकार कराया गया। इस पूरे अनुष्ठान में हनुमान सेना के अध्यक्ष सुधीर सिंह सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।

वहीं सनातन धर्म को अपनाने के बाद अथर्व ने कहा कि वे बचपन से मंदिरों में जाते रहे, पूजा-पाठ करते रहे और बजरंगबली के भक्त हैं। लेकिन बड़े होने पर नाम के कारण उन्हें कई बार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसी बीच बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुई हिंसा की खबरों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया—और यहीं से उनके जीवन का निर्णायक मोड़ शुरू हुआ।

काशी (Varanasi) के ब्राह्मण योगी आलोक से बातचीत के बाद उन्होंने काशी में ही घर वापसी करने का संकल्प लिया। नाव पर गंगा की लहरों के बीच, वैदिक मंत्रों और “हर-हर महादेव” तथा “जय श्रीराम” के जयघोष के साथ उनकी नई शुरुआत का साक्षी पूरा बनारस बना।
बताते चलें कि मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले अथर्व त्यागी सिविल इंजीनियर हैं और नगर निगम में ठेकेदारी का कार्य करते हैं। उनका परिवार अभी भी इस्लाम धर्म का पालन करता है, मगर वे स्पष्ट कहते हैं कि यह निर्णय पूरी तरह मेरी इच्छा और आस्था का है, किसी दबाव का नहीं।

