Varanasi: प्रयागराज में दर्ज एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा मामला अब चर्चा का केंद्र बन चूका है। कोर्ट के आदेश पर पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज होने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इसी बीच शंकराचार्य ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत भी किया।
केदारघाट स्थित श्रीमठ (Varanasi) में सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीने कहा कि अगर उनके ऊपर कोई आरोप लगा है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पुलिस को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं, ताकि उनके ऊपर लगा “कलंक” जल्द से जल्द साफ हो सके। उनके मुताबिक यह पूरा आरोप “गढ़ी हुई कहानी” पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भी जांच में सहयोग करेंगे और पुलिस का विरोध नहीं करेंगे।
Varanasi: सीसीटीवी कैमरों की करें जाँच
गिरफ्तारी (Varanasi) को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि अभी गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है, क्योंकि आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि कानून की प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी होती भी है तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। उनका कहना था कि माघ मेले के दौरान लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर ली जाए, जिससे सच्चाई सामने आ जाएगी।
शंकराचार्य ने कहा कि पुलिस (Varanasi) को मामले के निस्तारण में जितनी रुचि है, उतनी ही उन्हें भी है। मठ में पहुंचे अधिवक्ताओं को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी श्रद्धा से आए हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, आशुतोष महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दो बच्चों को पेश कर गंभीर आरोप लगाए थे। बच्चों के बयान कोर्ट में कैमरे के सामने दर्ज किए गए। कोर्ट के आदेश पर शनिवार देर रात झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामले में अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2–3 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इधर, प्रयागराज पुलिस के वाराणसी पहुंचने को लेकर दिनभर चर्चा का माहौल रहा। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि औपचारिक रूप से टीम के आने की पुष्टि का इंतजार है। मामले की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

