Varanasi: बड़ागांव थाना क्षेत्र में 25 दिसंबर की शाम हुई सनसनीखेज गोलीकांड में समीर सिंह की हत्या के मामले का पुलिस ने सफल अनावरण कर लिया है। करीब दो सप्ताह तक चले जांच के बाद बड़ागांव पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जबकि घटना के मुख्य आरोपी सहित अन्य नामजद अभियुक्त अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। इसका खुलासा डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल ने शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार में किया। इस हत्याकांड के मामले में आरोपियों को पकड़ने वाले टीम को 25,000 रूपये इनाम भी घोषित किया गया है।
डीसीपी गोमती जोन ने किया मामले का खुलासा
पुलिस उपायुक्त गोमती जोन आकाश पटेल ने बताया कि पुलिस के निर्देश के बाद जांच-पड़ताल शुरू हुई। पुलिस आयुक्त पिण्डरा के नेतृत्व में थाना बड़ागांव से एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस के लिए इस गुत्थी को सुलझाना और भी मुश्किल इसीलिए था क्योंकि मृतक और घायल (Varanasi) का आपस में कोई संबंध नहीं पाया गया। न ही किसी पुरानी रंजिश या व्यक्तिगत दुश्मनी का कोई स्पष्ट सुराग मिल पा रहा था। लेकिन तकनीकी साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अथक पुलिस प्रयासों ने आखिरकार इस गुत्थी को सुलझा दिया।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले (Varanasi) में शामिल तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें करन प्रजापति (21 वर्ष), पुत्र राधेश्याम प्रजापति, निवासी खरहरिया वारी, थाना बड़ागांव, प्रेमशंकर पटेल (30 वर्ष), पुत्र उमाशंकर पटेल, निवासी कनियर नरायनपुर, थाना बड़ागांव और शुभम मौर्य उर्फ लालू मौर्य (20 वर्ष), पुत्र उदयनाथ मौर्य, निवासी खरावन, थाना बड़ागांव शामिल है।
मामले में कई आरोपी भी फरार
डीसीपी ने कहा कि इस हत्याकांड में शामिल कई आरोपी अभी फरार हैं, जिनमें संदीप यादव, दीपक यादव उर्फ कन्हैया, मनीष यादव, पवन कुमार पाल और आकाश पाल शामिल है। इन सभी पर हत्या, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट समेत दर्जनों संगीन मुकदमे (Varanasi) पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ तलाश तेज कर दी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि बीते 25 दिसंबर को बड़ागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत दयालपुर गांव के पास कुछ युवकों ने रामू यादव और अभिषेक यादव से झगड़ा किया। झगड़े के दौरान रामू यादव को गोली मार दी गई। गोली चलाने के बाद आरोपी (Varanasi) वहां से भागने लगे, लेकिन इसी अफरातफरी में पीछे से गुजर रहे समीर सिंह को भी गोली मार दी गई। इस घटना में समीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रामू यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के संबंध में थाना बड़ागांव में कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि घटना वाले दिन वे अपने कुछ साथियों के साथ जंसा गए थे, जहां दोस्तों के साथ शराब पी। इसके बाद सभी लोग दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर साधोगंज की ओर लौट रहे थे।
दयालपुर गांव के पास एक बाग के पास वह रुके। तभी पीछे से आ रही एक बाइक आकाश पाल के पैर पर चढ़ गई। इसी बात पर विवाद हुआ और दोनों बाइक सवार युवकों (Varanasi) की पिटाई शुरू हो गई। शोर सुनकर गांव के कुछ लोग जुटने लगे, जिससे घबराकर आरोपियों ने गोली चलाने का फैसला किया। पहले एक युवक को गोली मारी गई और फिर भागते समय पीछे से जा रहे राहगीर समीर सिंह को गोली मारकर उसकी मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गए।
जांच क्यों थी इतनी चुनौतीपूर्ण?
इस हत्याकांड की विवेचना पुलिस के लिए कई कारणों से बेहद कठिन थी क्योंकि मृतक समीर सिंह और घायल रामू यादव के बीच कोई आपसी संबंध नहीं था। दोनों को गोली मारे जाने का कोई स्पष्ट उद्देश्य सामने नहीं आ रहा था। घायलों द्वारा अपराधियों की पहचान नहीं हो सकी।
घटनास्थल (Varanasi) गांव के अंदरूनी रास्ते पर था, जहां बाहरी लोगों की मौजूदगी संदिग्ध थी। घटनास्थल के आसपास लगे अधिकांश सोलर सीसीटीवी कैमरे लगातार चार दिन धूप न निकलने के कारण बंद थे। करीब 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन शुरुआत में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।
जांच के दौरान घटनास्थल (Varanasi) से कुछ दूरी पर लगे एक निजी कैमरे में एक वीडियो रिकॉर्डिंग मिली। वीडियो भले ही स्पष्ट नहीं था, लेकिन उसमें मौजूद ऑडियो क्लिप बेहद अहम साबित हुई। इसी ऑडियो के आधार पर कुछ संदिग्धों के नाम सामने आए, जिन पर पुलिस ने फोकस किया। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और स्थानीय स्तर पर सूचनाओं के संकलन के बाद पुलिस धीरे-धीरे आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

