Varanasi: शहर की संवेदनशील फिज़ा मंगलवार को अचानक गरमा गई, जब अवैध बूचड़खाने और गोकशी के आरोपों को लेकर हिन्दू संगठनों ने पानदरीबा क्षेत्र में हंगामा खड़ा कर दिया। एबीवीपी से जुड़े छात्र नेता शिवम तिवारी के नेतृत्व में पहुंचे युवकों ने बकरा मंडी में जमकर शोर-शराबा किया। लेकिन बुधवार को प्रशासन ने साफ किया कि यह महज अफवाह थी, और जांच में ऐसे किसी बूचड़खाने का प्रमाण नहीं मिला।
मंगलवार दोपहर चेतगंज क्षेत्र (Varanasi) की बकरा मंडी में रस्सी से बंधा एक मृत बकरा पड़ा था। इसी बीच करीब 20 युवक वहाँ पहुँचे और अवैध बूचड़खाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि वे आसपास के घरों के दरवाजे पीटने लगे, जिससे दूसरे पक्ष के लोग भी एकत्र हो गए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस और संगठन आमने-सामने
चेतगंज थाने (Varanasi) की पुलिस मौके पर पहुँची और समझाने का प्रयास किया। लेकिन हिन्दू संगठन के नेताओं ने दरोगा और पुलिसकर्मियों से बहसबाजी करते हुए चौकी परिसर तक में हंगामा किया। इस दौरान पुलिस अफसर मूकदर्शक बने रहे। छात्र नेता शिवम तिवारी की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
चेतगंज इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला ने बताया कि युवकों ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें खून से सनी जमीन दिखाई दे रही थी। हालांकि जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। मंडी संचालक (Varanasi) ने भी स्पष्ट किया कि मृत पशु को वे बिक्री के लिए नहीं रखते, इसलिए शव वहीं पड़ा रह गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मंडी सौ साल से अधिक पुरानी है और यहाँ केवल खरीद-फरोख्त होती है।
बुधवार को डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने मीडिया से कहा कि घटना पूरी तरह अफवाह पर आधारित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर से दो किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का बूचड़खाना प्रतिबंधित है। निरीक्षण में कहीं भी अवैध कटान का प्रमाण नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
मामले में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें चौकी इंचार्ज को धमकी देने और विधायक का नाम लेने का आरोप है। डीसीपी (Varanasi) ने कहा कि यह भी अफवाह थी और मौके पर किसी भी प्रकार की गोकशी नहीं पाई गई। पुलिस ने लोगों को समझाकर हटाया और माहौल शांत कराया।
Varanasi: सख्त कार्रवाई का आश्वासन
डीसीपी गौरव बंसवाल ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि अफवाह किसने फैलाई। जैसे ही दोषियों की पहचान होगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि बनारस जैसी संवेदनशील नगरी में इस तरह की अफवाह फैलाना गंभीर अपराध है और प्रशासन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
वाराणसी (Varanasi) की इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि अफवाहें कितनी तेजी से माहौल बिगाड़ सकती हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध बूचड़खाने का कोई अस्तित्व नहीं है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में दोषियों की पहचान कितनी जल्दी होती है और उन पर क्या कार्रवाई होती है।
