Varanasi: शहर की पवित्र गंगा घाटों पर बुधवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मकर संक्रांति पर्व की तिथियों को लेकर बने भ्रम को दरकिनार कर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा की गोद में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। सूर्योदय से लेकर अपराह्न तक घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और वातावरण में भक्ति, उल्लास और परम्परा का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

परम्परागत रूप से 14 जनवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भोर से ही श्रद्धालु परिवार सहित गंगा स्नान (Varanasi) के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। जैसे ही सूर्यदेव ने अपनी किरणें बिखेरीं, घाटों पर स्नान-ध्यान का सिलसिला शुरू हो गया। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई और दोपहर तक गंगा तट पर आस्था का महासागर उमड़ पड़ा।

दुर्लभ संयोग का महत्व
दशाश्वमेध घाट (Varanasi) के तीर्थ पुरोहित पंडित अजय शर्मा ने बताया कि इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। करीब 23 साल बाद बना यह संयोग अत्यंत पुण्यकारी माना जा रहा है। अपराह्न 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश किया, जिसे संक्रांति का वास्तविक क्षण माना जाता है। यही कारण है कि तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही, लेकिन श्रद्धालु दोनों दिन स्नान-दान कर रहे हैं।

Varanasi: गंगा स्नान और पतंगबाजी का उत्सव
काशीवासियों और बाहर से आए श्रद्धालुओं (Varanasi) ने गंगा स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। स्नान के बाद घाटों से लेकर घरों की छतों तक पतंगबाजी का उत्सव शुरू हो गया। बच्चों और युवाओं की उमंग ने पर्व को और जीवंत बना दिया। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सज गया और घाटों पर आस्था के साथ उल्लास का दृश्य भी देखने को मिला।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन (Varanasi) पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती से लेकर ड्रोन कैमरों द्वारा निगरानी तक, हर स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को निर्भय होकर स्नान और पूजा करने का अवसर दिया।
इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर पंचांगों में मतभेद देखने को मिला। कहीं 14 जनवरी को पर्व मनाने की बात कही गई, तो कहीं 15 जनवरी को। अयोध्या में रामलला मंदिर के शुभ मुहूर्त निकालने वाले विद्वान पं. गणेश्वर द्राविड़ ने स्पष्ट किया कि गणेश आपा जी पंचांग और देशपांडे पंचांग में पुण्यकाल 14 जनवरी को दिया गया है। हालांकि, भूल सुधार के लिए 15 जनवरी को स्नान, दान और श्राद्ध पूजन करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि पंचांगों को लेकर दुष्प्रचार करना उचित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को आस्था और परम्परा के साथ पर्व मनाना चाहिए।

