Varanasi: लोहता गांव गुरुवार दोपहर उस समय गम के साये में डूब गया, जब एक ही घर से एक साथ पाँच जनाजे उठे। बाराबंकी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बुधवार को हुए भीषण हादसे में यूपी पुलिस के कांस्टेबल जावेद अशरफ सिद्दीकी की पत्नी चाँदनी उर्फ गुलफ्शां (30), बेटियाँ समरीन (12), इलमा (6), इस्मा (4) और बेटा जियान (10) की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद सभी के शव देर रात गांव पहुंचे, जहां गुरुवार को नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद उन्हें पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

Varanasi: जनाजे का सदमा नहीं झेल सका दोस्त
जनाजा में शामिल कांस्टेबल जावेद (Varanasi) के मित्र मोहम्मद शब्बू (55), निवासी कोहड़ा, आजमगढ़, सदमे को सहन नहीं कर सके। पांच जनाजे एक साथ देखकर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। भीड़ ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनटों में उन्होंने दम तोड़ दिया। शब्बू आजमगढ़ में उसी मोहल्ले में रहते थे जहाँ जावेद किराये के मकान में रहता है। बच्चे उन्हें ‘मामू’ कहकर बुलाते थे।
18 दिन पहले दादा, आज बहू, पोते–पोती भी दफन
मृतकों को उनके दादा मंजाद खान की कब्र के पास दफनाया गया। मंजाद खान का मात्र 18 दिन पहले हार्ट अटैक से निधन हुआ था। ताज़ी बनी उनकी कब्र के बगल में गुरुवार को पाँच नई कब्रें (Varanasi) बनती देख गांव के लोग फफक पड़े।

जानिए कैसे हुआ हादसा
बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे घटना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, रामसनेही घाट (बाराबंकी) क्षेत्र में हुई। गाजियाबाद नंबर की वैगनआर में सवार जावेद का परिवार मऊ से लखनऊ जा रहा था। चाँदनी के भाई जीशान कार चला रहे थे। गाड़ी में खराबी आने पर उन्होंने कार एक्सप्रेस-वे किनारे रोक दी।
इसी दौरान दिल्ली से आ रही एक ब्रेज़ा कार ने पीछे से तेज टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। वैगनआर में लगी CNG किट ने आग को और भड़का दिया। जब तक फायर ब्रिगेड पहुंची, दोनों कारें जलकर राख हो चुकी थीं।

वैगनआर में सवार 6 में से 5 लोगों की मौके पर मौत हो गई। जबकि ड्राइवर जीशान (Varanasi) गंभीर रूप से घायल हैं। ब्रेज़ा में सवार दिल्ली के दक्षिणपुरी के 4 लोग भी जख्मी हुए, जिनमें एक किशोरी दीप्ति मिश्रा की हालत नाजुक है।
गांव में सुबह से मातम, जनाजे में उमड़ा सैलाब
सुबह से ही लोहता (Varanasi) में सन्नाटा और रोने-बिलखने की आवाजें गूंजती रहीं। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग जनाजे में शामिल होने पहुंचे। बच्चों के छोटे-छोटे ताबूत देखकर लोग खुद को संभाल नहीं पाए। कई परिजन बेहोश हो गए।
हादसा इतना भयानक था कि जब कांस्टेबल जावेद (Varanasi) को इसकी खबर मिली, वे बेहोश हो गए। अब घर में अकेले रह गए जावेद को संभालना प्रशासन और परिजनों के लिए चुनौती बन गया है। परिवार के लोगों ने कहा कि यह यात्रा मऊ से लखनऊ की थी, लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह सबके लिए आखिरी सफर साबित होगा।

