Varanasi Food: सुबह की पहली किरण के साथ बनारस की गलियों में जब गरमागरम हींग की कचौड़ियों की खुशबू तैरती है, जब पान की गिलौरियों में अपनापन लिपटता है और ठंडाई का शीतल स्वाद गले से उतरता है—तब महसूस होता है कि काशी केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि स्वाद की भी राजधानी है। अब यही पारंपरिक स्वाद ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ योजना के जरिए वैश्विक पहचान पाने की ओर अग्रसर है।
योगी आदित्यनाथ सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले के विशिष्ट व्यंजन को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और आधुनिक तकनीक के साथ नए बाजार उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री पीआर सेल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बजट में इस योजना के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधानकिया गया है।
Varanasi Food: ब्रांडिंग, पैकेजिंग और फूड सेफ्टी पर जोर
योजना के अंतर्गत पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने के लिए विक्रेताओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। आकर्षक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान रहेगा। साथ ही गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सभी उत्पादों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला स्वाद मिल सके।
बनारस के जिन व्यंजनों (Varanasi Food) ने दशकों से लोगों के दिलों पर राज किया है, वे अब ओडीओसी (One District One Cuisine) में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। हाल ही में यूपी दिवस के अवसर पर लखनऊ में लगे स्टालों पर तिरंगा बर्फी, हींग की कचौड़ी, बनारसी पान, लौंगलता और ठंडाई ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
काशी (Varanasi Food) की सुबह कचौड़ी-जलेबी के बिना अधूरी मानी जाती है। कहीं छोटी कचौड़ी, कहीं बड़ी कचौड़ी, तो कहीं रस से भरा जलेबा—हर रूप में स्वाद का अलग रंग देखने को मिलता है। बनारसी खानपान के दीवाने केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं।
आर्थिक से ज्यादा सांस्कृतिक पहल
‘एक जनपद, एक व्यंजन’ केवल आर्थिक सशक्तिकरण की योजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास भी है। काशी (Varanasi Food) की रसोई में पीढ़ियों से सहेजे गए स्वाद अब विश्व व्यंजन मानचित्र पर अपनी जगह बनाने को तैयार हैं। जब बनारस की गलियों से उठती खुशबू अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगी, तो यह सिर्फ व्यापार नहीं होगा, बल्कि भारत की समृद्ध पाक विरासत का वैश्विक उत्सव भी होगा। सरकार जल्द ही दावेदार व्यंजनों में से उपयुक्त विकल्प पर अंतिम मुहर लगाएगी।

