Varanasi: गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन शहर से लेकर गांवों तक बाढ़ की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत शिविरों की संख्या बढ़ाकर 16 से 17 कर दी है, जिनमें अब तक 388 परिवारों के 2301 लोग शरण लिए हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.40 मीटर दर्ज किया गया था, और इसमें दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से गिरावट आ रही थी। दोपहर में यह घटकर 1.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से कम हुआ। शाम को फिर से जलस्तर (Varanasi) घटने लगा, और रात आठ बजे यह चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से दो सेंटीमीटर नीचे 70.24 मीटर पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटों में जलस्तर में कुल 26 सेंटीमीटर की गिरावट आई है।
हालांकि जलस्तर (Varanasi) में कमी हो रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। विशेष रूप से निचले इलाकों में रहने वाले लोग अब भी तनाव में हैं। गंगा और वरुणा नदी के किनारे बसे लोग अपने घरों और सड़कों पर जमी गाद और गंदगी की सफाई में जुट गए हैं। खाली प्लॉटों में भरे पानी से बदबू उठने लगी है, जिससे हालात और खराब हो गए हैं। नगर निगम की टीम सफाई, फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव लगातार कर रही है।
एडीएम वित्त वंदिता श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए मेडिकल कैंपों में अब तक 655 लोगों का इलाज किया जा चुका है और 1353 ओआरएस पैकेट एवं 9285 क्लोरीन टैबलेट का वितरण किया गया है।
राहत सामग्री का वितरण जारी
अब तक बाढ़ प्रभावित 774 परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है, जबकि 410 महिलाओं को डिग्निटी किट भी वितरित की गई है। शिविरों में 2376 फलों और 2034 दूध के पैकेट भी बांटे गए हैं। पशुओं के लिए 802 क्विंटल भूसा का वितरण भी किया गया है।
खेतों में बर्बाद फसलें
शहंशाहपुर में बाढ़ के पानी से हजारों एकड़ की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। खेतों में पानी भरने के कारण फसलें सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। सब्जियों की फसलें भी बर्बाद हो चुकी हैं।
बचाव के लिए Varanasi में नावें तैनात
बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने 23 नावें लगाई हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीम भी मोटर बोट के जरिए राहत कार्य कर रही है।


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