Varanasi की गंगा तट पर बीते वर्ष की विदाई और नए साल के स्वागत का दृश्य किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं था। दशाश्वमेध घाट पर दीपों की झिलमिलाहट और मंत्रोच्चार की गूंज ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। श्रद्धालुओं का सैलाब इस बात का प्रमाण था कि काशी की परंपरा में हर वर्ष का अंतिम दिन केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि आस्था और उत्सव का संगम होता है।

Varanasi:5100 दीपों से जगमगाया घाट
साल 2025 की अंतिम संध्या पर दशाश्वमेध घाट (Varanasi) पर गंगा आरती का आयोजन अभूतपूर्व रहा। 5100 दीपों से जगमगाते घाट पर जब पुजारियों ने शंखनाद और घंटियों की ध्वनि के बीच आरती की थालियाँ उठाईं, तो पूरा घाट का किनारा श्रद्धा और उत्साह से भर गया। 5100 दीपों से स्वागतम 2026 लिखकर नए साल का स्वागत किया गया। दीपों की रोशनी से दशाश्वमेध घाट पर अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिला। लगभग एक लाख लोग घाट पर मौजूद रहें।

गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि इस अवसर को विशेष बनाने के लिए पूरे घाट पर दीप प्रज्वलित किए गए थे, जिससे वातावरण में दिव्यता और उत्सव का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
घाटों पर पहुंचे लाखों श्रद्धालु
वहीं नववर्ष की पूर्व संध्या पर घाट (Varanasi) पर लाखों श्रद्धालु पहुंचे। हर कोई नए साल की शुरुआत गंगा मैया के आशीर्वाद से करना चाहता था। पूजा-पाठ, भजन और सामूहिक प्रार्थनाओं ने घाट को एक विशाल आध्यात्मिक मंच में बदल दिया। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतज़ाम किए।
वाराणसी (Varanasi) के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने साफ किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नववर्ष की भीड़ को देखते हुए घाटों पर पुलिस बल और जलपुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। निगरानी व्यवस्थाएं लगातार सक्रिय रहीं ताकि श्रद्धालु बिना किसी भय के उत्सव का आनंद ले सकें।

