Varanasi: पुलिस की असली वर्दी पहनकर नकली क्राइम ब्रांच चलाने वाले दरोगा सूर्य प्रकाश पांडेय को कोर्ट से जमानत मिल गयी। इसमें पुलिस की लचर पैरवी सामने आई है। जज ने पहले उसकी जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी, लेकिन पुलिस की कमजोर पैरवी और अधूरी जांच के कारण दरोगा को जमानत मिल गयी। पुलिस के अधूरे सबूत दरोगा की जमानत रोक नहीं सके। बीते 22 जून 2024 में जीटी रोड पर एक ज्वेलरी कारोबारी के कर्मचारियों से 93 लाख रुपये लूटे गए, जिनमें से दरोगा ने हवाला का पैसा बताकर 42 लाख रुपये खुद रख लिए और बाकी 51 लाख रुपये लौटा दिए।

दरोगा के खिलाफ बर्खास्तगी और सख्त सजा की बातें केवल बयानबाजी बनकर रह गईं। जमानत मिलने के बाद जब उच्च अधिकारियों को इस घटना की जानकारी हुई, तब उन्होंने अधीनस्थों पर नाराजगी व्यक्त की और समय पर सूचना न देने के लिए पुलिस कमिश्नर ने कड़ा रुख अपनाया।
Varanasi: पुलिस की कमजोर पैरवी ने खोली पोल
हालांकि, कमजोर पैरवी और अधूरी पुलिस जांच के कारण हाईकोर्ट से दरोगा को जमानत मिल गई। पुलिस जांच में दरोगा की संलिप्तता साबित होने के बावजूद, अदालत में सख्त कार्रवाई (Varanasi) की कमी के कारण उसकी रिहाई संभव हो सकी। इस मामले में पुलिस आयुक्त ने नाराजगी जाहिर करते हुए तत्कालीन एसीपी कोतवाली अमित श्रीवास्तव का तबादला कर उन्हें एसीपी सुरक्षा का कार्यभार सौंपा, जबकि रामनगर थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा को लाइन हाजिर किया गया।
दरोगा सूर्य प्रकाश पांडे को अब तक 8 लाख रुपये बरामदगी के बावजूद जमानत मिल गई, जिसने पुलिस की कार्यशैली और अभियोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।