Varanasi की सड़कों पर ईमानदारी की कसौटी पर खरे उतरने का दावा करने वाली पुलिस को एक बार फिर शर्मसार होना पड़ा है। ट्रैफिक विभाग में तैनात इंस्पेक्टर शिवाकांत शुक्ला पर रिश्वत लेने का आरोप साबित होने के बाद पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने उन्हें देर रात लाइन हाजिर कर दिया। मामला केवल 3000 रुपये की वसूली का नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो नागरिकों से कानून के नाम पर वसूली करती है और फिर खुद ही कानून तोड़ती है।
शिकायत से जांच तक
बादशाह बाग कॉलोनी (Varanasi) निवासी हेमंत मेहरा, जिनके पास कई ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, ने आरोप लगाया कि उनके वाहन को मरी माई मंदिर तिराहे पर रोका गया। चालक को भारी जुर्माने की धमकी दी गई और बिना चालान वाहन छोड़ने के लिए 4500 रुपये की मांग की गई। जब वाहन स्वामी मौके पर पहुंचे तो होमगार्ड ने इंस्पेक्टर से फोन पर बात कराई और अंततः सौदा 3000 रुपये में तय हुआ। पैसे खुलेआम शौचालय के पास थमाए गए।
अफसरों की कार्रवाई
पीड़ित ने मामले की शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर से की। एडिशनल सीपी शिवहरी मीणा (Varanasi) ने जांच बैठाई और बयान दर्ज कराए। जांच में होमगार्ड ने इंस्पेक्टर का नाम लिया। जब उनसे जवाब तलब किया गया तो वह संतोषजनक नहीं पाया गया। नतीजतन इंस्पेक्टर के खिलाफ चार्जशीट तैयार हुई और उन्हें तत्काल कार्यमुक्त कर दिया गया। साथ ही एक अन्य विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
Varanasi: भ्रष्टाचार पर सवाल
यह घटना केवल एक इंस्पेक्टर की गलती नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें वर्दी का इस्तेमाल जिम्मेदारी निभाने के बजाय निजी लाभ के लिए किया जाता है। ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहन, जो आम आदमी की रोज़ी-रोटी का साधन हैं, उनसे इस तरह की वसूली न केवल कानून का अपमान है बल्कि सामाजिक न्याय पर भी चोट है।
जनता की उम्मीदें
वाराणसी (Varanasi) जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक शहर में पुलिस की छवि पहले से ही जनता की निगाहों में कठोर और संदेहास्पद रही है। ऐसे मामलों से भरोसा और भी कमजोर होता है। अब सवाल यह है कि क्या विभागीय जांच केवल औपचारिकता होगी या वास्तव में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का ठोस कदम उठाया जाएगा।
इंस्पेक्टर शिवाकांत शुक्ला का लाइन हाजिर होना एक तात्कालिक कार्रवाई है, लेकिन असली चुनौती उस व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की है। जब तक (Varanasi) पुलिस व्यवस्था में ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे। वाराणसी की जनता अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि बदलाव की उम्मीद कर रही है

