Varanasi की जनता जिस ओवरब्रिज का सपना सात साल से देख रही है, उसका सफर अब दस दिन और टल गया है। कज्जाकपुर रेलवे ओवरब्रिज, जिसे गाजीपुर, मऊ, बलिया और चंदौली की राह आसान बनाने वाला बताया जा रहा है, तकनीकी कारणों और विभागीय लापरवाही के चलते एक बार फिर समयसीमा से पीछे छूट गया।
अधूरी राह, अधूरी उम्मीदें
डीएम सत्येंद्र कुमार ने हाल ही में निरीक्षण कर राजकीय सेतु निगम को निर्देश दिया था कि 1 दिसंबर से पुल (Varanasi) चालू कर दिया जाए। लेकिन अंतिम चरण की पिचिंग और फिनिशिंग का काम अधूरा होने के कारण उद्घाटन को दस दिन आगे बढ़ा दिया गया। यह सातवीं बार है जब इस परियोजना की समयसीमा बढ़ाई गई है।
सात साल का सफर, अधूरा पुल
सितंबर 2019 में शुरू हुए इस आरओबी को जून 2022 तक पूरा होना था। लेकिन काम की धीमी रफ्तार और विभागीय पेंच ने इसे बार-बार आगे धकेला। कभी मार्च 2024, कभी दिसंबर 2023, फिर जून 2025 हर बार नई तारीख तय हुई, लेकिन जनता को मिला सिर्फ इंतजार। अंतिम डेटलाइन 30 नवंबर भी निकल गई और पुल अब भी अधूरा है।
जनता की परेशानी, आंदोलन की आवाज
कज्जाकपुर रेलवे क्रॉसिंग बंद करने को लेकर लंबे समय तक खींचतान चली। छोटे वाहन कभी निकलते, कभी रोके जाते। क्षेत्रीय लोग कई बार आंदोलन तक कर चुके हैं, लेकिन उनकी आवाज को नजरअंदाज कर दिया गया। इस बीच नक्खी घाट, तेलियाना फाटक और कज्जाकपुरा (Varanasi) पर रोजाना लगने वाला जाम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है। तीन हजार से अधिक वाहन रोज इन रास्तों से गुजरते हैं और घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं।
ओवरब्रिज का महत्व
यह पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि वाराणसी और आसपास के जिलों के लिए राहत की सांस है। इसके शुरू होते ही राजघाट (Varanasi) से चंदौली की ओर जाने वाले वाहन बिना रुकावट निकल सकेंगे। पांडेयपुर, आशापुर, सारनाथ और जाल्हूपुर के रास्ते जाने वालों को रेलवे फाटक पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। भदऊ चुंगी के पास जाम की समस्या खत्म होगी और आवागमन सामान्य हो जाएगा।
कज्जाकपुर ओवरब्रिज (Varanasi) का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है, यही कारण है कि अधिकारी तारीखों पर खुलकर कुछ कहने से बचते रहे। लेकिन सवाल यह है कि जनता कब तक इस इंतजार की कीमत चुकाती रहेगी। सात साल से अधूरी परियोजना अब जनता के धैर्य की परीक्षा बन चुकी है। वाराणसी को राहत देने वाला यह पुल कब तक केवल वादों और तारीखों में उलझा रहेगा ,यह सवाल अब सीधे प्रशासन की जवाबदेही पर खड़ा है।

