Varanasi: धार्मिक नगरी काशी में नाव संचालन पर लगाए गए डेढ़ माह के प्रतिबंध ने करीब 40 हजार नाविकों और मछुआरा परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने बाढ़ राहत कार्यों के मद्देनज़र ढाई हजार नावों को खड़ा करा दिया है, जबकि गंगा नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से लगभग पांच मीटर नीचे है। इस निर्णय के चलते नाविक समाज के सामने आर्थिक तंगी और बेरोजगारी की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
नाव संचालन बंद होने से नाविकों के परिवारों को बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, स्कूल फीस, किराया, दवाइयों और भोजन जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
Varanasi: प्रशासन के रवैये पर सवाल
नाविक समाज का कहना है कि जब गंगा का जलस्तर सामान्य है और बाढ़ का ख़तरा टल चुका है, तो नाव संचालन पर प्रतिबंध जारी रखना अनुचित है। उनका आरोप है कि गंगा (Varanasi) पर बड़े क्रूज़ संचालन की अनुमति जारी है, जबकि गरीब नाविकों की जीविका पर रोक लगा दी गई है। इससे शासन और प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
नाविकों का यह भी कहना है कि बाढ़ और आपदा की घड़ी में प्रशासन के साथ मिलकर हमेशा नाविक समाज ने राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया है। ऐसे में वही नाविक आज प्रतिबंध की मार झेल रहे हैं।
नाविक समाज ने सरकार से लगाई गुहार
“मां गंगा निषाद राज सेवा समिति उत्तर प्रदेश” के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद गुरु ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि नाव संचालन (Varanasi) पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए। उन्होंने कहा कि 40 हजार परिवार पूरी तरह नाव संचालन पर निर्भर हैं और लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहने से उनके सामने भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।

