Varanasi: बच्चों के यौन शोषण मामले में प्रयागराज पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। तीन दिन से पुलिस काशी में डेरा जमाए हुए है, लेकिन अब तक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछताछ नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस पहले सबूतों को मजबूत कर रही है। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील और हाईप्रोफाइल है, इसलिए हर कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा है। पुलिस का मानना है कि जब तक पूरा होमवर्क नहीं हो जाता, सीधे शंकराचार्य और उनके शिष्यों से पूछताछ करना जोखिम भरा होगा।
शंकराचार्य का बयान और हिंदुत्व की चिंता
बुधवार को शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में हिंदुत्व पर खतरे की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जब केवल भगवा चोला पहनकर लोग खुद को हिंदू बताने लगेंगे, तो असली हिंदुत्व पर संकट आ जाएगा। उनके मुताबिक, ऐसे लोग जो वास्तव में हिंदू नहीं हैं, लेकिन दिखावे के लिए खुद को हिंदू कहते हैं, वही सबसे बड़ा खतरा हैं। उन्होंने यौन शोषण के आरोपों (Varanasi) को साजिश करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर और भी छात्रों का शोषण हुआ है, तो बाकी को अब तक क्यों बचाकर रखा गया है। उन्होंने कहा कि केवल दो बच्चों से मुकदमा कराना ही इस बात का संकेत है कि इसके पीछे कोई बड़ी योजना है।
इस पूरे विवाद में कांग्रेस खुलकर शंकराचार्य (Varanasi) के समर्थन में उतर आई है। पार्टी ने घोषणा की है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में शंकराचार्य के पक्ष में प्रदर्शन किए जाएंगे। इससे साफ है कि मामला अब धार्मिक और कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।
Varanasi: विवाद की जड़- माघ मेले से कोर्ट तक
पूरा मामला प्रयागराज माघ मेले से शुरू हुआ। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। इसके बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए।
8 फरवरी को कार्रवाई न होने पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश (Varanasi) पर उसी दिन झुंसी थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपियों को नामजद किया गया।
24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की। इस तरह मामला अब कानूनी लड़ाई और राजनीतिक समर्थन दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है।

