गंगा नदी के जलस्तर (Varanasi Water Level) में लगातार हो रही वृद्धि से वाराणसी के घाटों पर बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे हैं। गंगा का पानी 63.13 मीटर तक पहुंच गया है, जो कि खतरे के निशान से लगभग 8 मीटर नीचे है, लेकिन तेजी से बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। इस समय लगभग डेढ़ सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके चलते काशी के 25 घाटों के बीच आपसी संपर्क टूट गया है और कई ऐतिहासिक मंदिर जलमग्न हो चुके हैं।

जलस्तर बढ़ने के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर छोटी नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। साथ ही एनडीआरएफ, जल पुलिस और सिविल पुलिस की टीमें घाटों व निचले इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। एडीसीपी सरवण टी स्वयं अस्सी घाट से नमो घाट तक दौरा कर हालात की समीक्षा कर चुके हैं।
Varanasi Water Level: मंदिरों पर बाढ़ की सीधी मार
काशी के घाटों पर बने कई ऐतिहासिक और श्रद्धा के केंद्र माने जाने वाले 150 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर गंगा में डूब चुके हैं। मणिकर्णिका घाट (Varanasi Water Level) का प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर, सिंधिया घाट, पंचगंगा घाट और दशाश्वमेध क्षेत्र के अनेक मंदिर पानी में समा चुके हैं।

शवदाह घाटों पर बदले इंतजाम
गंगा के बढ़ते जलस्तर (Varanasi Water Level) का सीधा असर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार व्यवस्था पर पड़ा है। मणिकर्णिका घाट के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। अब केवल मंदिर के सामने की करीब 12-15 चिताओं की जगह बची है। पुनरुद्धार प्रोजेक्ट के कारण छत का बड़ा हिस्सा टूट चुका है, जिससे वहां चिताएं लगाना मुश्किल हो गया है।

बात अगर हरिश्चंद्र घाट की करें तो सीढ़ियों पर ही फिलहाल दाह संस्कार किया जा रहा है। अगर पानी और बढ़ा तो शवदाह गलियों में करना पड़ सकता है। शवदाह करने वाले कर्मियों का कहना है कि बाढ़ के कारण लोगों को अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जो कभी-कभी डेढ़ घंटे तक खिंच जाता है।
प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
वरुणा नदी और गंगा के संगम क्षेत्र सहित सभी निचले इलाकों में प्रशासन अलर्ट मोड में है। हर साल की तरह बाढ़ चौकियों पर कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं। हालांकि फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (71.26 मीटर) से नीचे है, लेकिन केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर में फिर से वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रशासन और राहत टीमें लोगों से लगातार अपील कर रही हैं कि गहरे पानी में न जाएं और अफवाहों से बचें। एनडीआरएफ पूरी तरह मुस्तैद है और स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। 1978 का रिकॉर्ड 73.90 मीटर अब भी काशी के लिए चेतावनी (Varanasi Water Level) का संकेत बना हुआ है, और शहरवासी चिंतित हैं कि यदि बारिश का यही दौर जारी रहा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

