Varanasi: वाराणसी कमिश्नरेट की महिला थाने की प्रभारी निरीक्षक सुमित्रा देवी को एंटी करप्शन टीम ने उस वक़्त रंगे हाथ पकड़ लिया जब वह रिश्वतखोरी कर रही थी। आरोप है कि उन्होंने एक केस में कार्रवाई करने और आरोपियों पर चार्जशीट लगाने के लिए 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद एंटी करप्शन यूनिट ने जाल बिछाया और कोतवाली परिसर के अंदर ही थानाध्यक्ष को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई में महिला सिपाही अर्चना राय भी गिरफ्त में आई, जो रिश्वत की रकम लेने में मध्यस्थ बनी थीं। महिला थाने की प्रभारी के गिरफ्तार होने से कमिश्नरेट के अधिकारियों में हलचल मची है।

एंटी करप्शन की तेजतर्रार टीम, इंस्पेक्टर संध्या सिंह के नेतृत्व में, शुक्रवार को जब महिला थाने पहुंची तो सुमित्रा देवी ने रौब दिखाने की कोशिश की। समझौते की पेशकश भी की, लेकिन टीम ने एक न सुनी। ऑफिस से खींचते हुए उन्हें गाड़ी में बैठाया गया और सीधे कैंट थाने ले जाया गया।
केस में कार्रवाई के लिए मांगी थी रिश्वत
जांच में सामने आया कि सुमित्रा देवी ने पीड़ित मेराज से एफआईआर से नाम हटाने के बदले 20 हजार की मांग की थी। 10 हजार की पहली किश्त महिला कांस्टेबल अर्चना राय को दी गई, उसी वक्त टीम ने दोनों को धर दबोचा। अर्चना राय, 2016 बैच की सिपाही, भी गिरफ्त में है। मेराज ने बताया कि उसके खिलाफ घरेलू विवाद में मुकदमा दर्ज हुआ था। इंस्पेक्टर ने जेल भेजने की धमकी दी और फिर पैसे की मांग की। मेराज ने एंटी करप्शन कार्यालय को सूचना दी, जिसके बाद जाल बिछाया गया और ऑपरेशन अंजाम तक पहुंचा।
Varanasi: प्रयागराज की रहने वाली हैं सुमित्रा देवी
गिरफ्तार प्रभारी निरीक्षक सुमित्रा देवी मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र के महमूदाबाद गंगादीप कॉलोनी की रहने वाली हैं। वह 2010 बैच की पुलिस अधिकारी हैं और लखनऊ के विभिन्न थानों में 11 साल तक तैनात रह चुकी हैं।
2 सितंबर 2021 को उनका तबादला लखनऊ से वाराणसी कमिश्नरेट में हुआ था। इसके बाद उन्हें महिला थाने का प्रभारी बनाया गया। 28 सितंबर 2023 को सीएम योगी के निर्देश पर उनका स्थानांतरण राजातालाब थाने में हुआ था, लेकिन बाद में उन्हें फिर से महिला थाने की जिम्मेदारी दे दी गई।
पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सुमित्रा देवी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। उन पर केस निपटाने में देरी और पक्षपातपूर्ण रवैये के आरोप लगे थे, लेकिन अब एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई ने इन सभी संदेहों की पुष्टि कर दी है।

