- इस बार नवसंवत्सर का नाम होगा पींगल
- सूर्य ग्रह का तेज सम्पूर्ण संवत्सर पर दिखेगा
- चैत्र नवरात्र के प्रतिपदा से विक्रम संवंत 2080 की होगी शुरूआत
वाराणसी। चैत्र नवरात्र के प्रतिपदा से नव विक्रम 2080 नवसंवत्सर का शुभारंभ होगा। नवसंवत्सर पर बुध राजा होंगे। जबकि शुक्र मंत्री होंगे। इस बार नवसंवत्सर का नाम पींगल होगा। अंक ज्योतिष के अनुसार 2080 का संयुक्त अंक 10 तथा एक अंक 1 बनता है। जिसका स्वामी ग्रह सूर्य होता है। सूर्य ग्रह का तेज सम्पूर्ण संवत्सर में रहेगा।
प्रसिद्ध ज्योतिषविद् पं. विमल जैन के मुताबिक विक्रम संवंत 2080 का शुभागमन 22 मार्च 2023 बुधवार से हो रहा है। विक्रम संवंत में दशाधिकारियों में पांच अधिकारी सौम्य ग्रहों को तथा पांच पद क्रूर अधिकारी होते हैं। इनमें प्रथम बुध-राजा, शुक्र- मंत्री, सूर्य-सश्चेष्ठ, शनि- धानेश, गुरु- निगेश, मंगल- रसेश, सूर्य-निरशेष, गुरु- फलेश, सूर्य-धनेश, गुरु- दुर्गेश हैं। नव विक्रम संवंत 2080 का प्रवेश वृच्छिक लग्न में हो रहा है। लग्न का स्वामी ग्रह मंगल शत्रु क्षेत्रीय होकर अष्टम भाव में विराजमान है। सूर्य चन्द्रमा, बुध व गुरु से चर्तुग्रही योग बन रहा है। शनि अपनी स्वराशि कुंभ में है जिसके फलस्वरूप समस्त विश्व में सुख-समृद्धि तथा खुशहाली का सुयोग बना रहेगा।
पं. विमल जैन के मुताबिक पींगल संवत्सर को शुभ माना गया है। हालांकि इसका स्वामी ग्रह राहु है। दशाधिकारियों को मिले पदों के अनुसार यह संवंत जनमानस को सुख-समृद्धि व सफलता प्रदान करता है। समस्त पक्षों में कम या अधिक रूपों से सामान्य शुभ फलदायी रहेगा।
राजनीतिक हलचल में होगी वृद्धि
राजनीतिक हलचल में वृद्धि देखी जा सकेगी। विक्रम संवंत 2080 के प्रारम्•िाक तीन मास अप्रत्याशित घटनाओं से ओतप्रोत रहेंगे। जिसके फलस्वरूप जनमानस को झकझोर देने वाली घटनाओं से रूबरू होना पड़ेगा। राजनैतिक क्षेत्र में विशेष फेरबदल व परिवर्तन तथा नव समीकरण देखने को मिलेंगे। पक्ष-विपक्ष के समक्ष नई चुनौतियों का सामान करना पड़ेगा। ग्रहगोचर के परिवर्तन के फलस्वरूप विश्व पटल पर अनहोनी एवं अप्रत्याशित घटनाओं का नजारा भी देखने को मिलेगा। राजा बुध होने से नव युवाओं का हर क्षेत्रों में बोलबाला रहेगा।
हर क्षेत्र में महिलाओं का रहेगा वर्चस्व
शुक्र ग्रह मंत्री होने से सुख-समृद्धि की आकांक्षा तो हर वर्ग में बढ़ेगी। साथ ही रह क्षेत्र में महिलाओं का वर्चस्व देखा जा सकेगा। सूर्य ग्रह को तीन प्रमुख पद पर आसीन होने से विश्व में भारत की प्रतिष्ठा का डंका बजेगा। नव संवंत वर्ष में कई बार चर्तुग्रही व पंचग्रही योग भी बनेगा।
इस बार सावन मास अधिक मास होगा
नवसंवत्सर में इस बार सावन मास अधिक मास होने से संवंत में 13 मास हो जायेंगे। नवसंवत्सर पर अपने आराध्य व इष्ट देवी देवताओं की पूजा अर्चना करनी चाहिए। साथ ही पंचांग का श्रवण करना चाहिए। इस दिन नीम के कपोलों (पत्तियों) व गोल मिर्च ग्रहण करना चाहिए। इसी दिन 22 मार्च से वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हो जायेगा।