Year Ender 2024: साल बीतने में चंद दिन ही शेष बचे हुए हैं। हर साल जाते-जाते अपने साथ कुछ यादें छोड़ जाता है, लेकिन यह साल बनारस के लिए काफी खास रहा। इस वर्ष के शुरुआत से ही शहर में राजनीतिक घटनाओं ने हलचल मचाई। इनमें IIT-BHU रेप कांड के आरोपियों के पकड़े जाने से लेकर प्रधानमंत्री के तीसरी बार इसी सीट से चुनाव जीतने तक चर्चा में रहा। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के कारण इस साल बनारस काफी चर्चा में रहा।
1. वाराणसी: तीसरी बार बना देश का नेतृत्वकर्ता (Year Ender 2024)
2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी ने तीसरी बार नरेंद्र मोदी को सांसद चुनकर देश का नेतृत्व करने का मौका दिया। प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार इस सीट से उनकी जीत ने वाराणसी को फिर से वैश्विक मंच पर चर्चित बना दिया। नरेंद्र मोदी की इस ऐतिहासिक जीत पर पूरे विश्व की निगाहें जमी थीं।

2. एनडीए का शक्ति प्रदर्शन
नरेंद्र मोदी के नामांकन के दौरान वाराणसी में एनडीए के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला। नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे बड़े नेता उपस्थित रहे। इसके साथ ही, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दशाश्वमेध घाट पर गंगा पूजा और कालभैरव मंदिर में दर्शन के साथ मोदी ने अपना प्रचार शुरू किया।

3. राहुल गांधी की न्याय यात्रा
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वाराणसी में अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिए विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया। सपा और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से यह यात्रा वाराणसी के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए गोदौलिया पर समाप्त हुई। यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने काशी विश्वनाथ धाम में पूजा-अर्चना भी की और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।

4. प्रियंका गांधी और डिंपल यादव का रोड शो
विपक्षी दलों को मजबूत करने के उद्देश्य से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और सपा नेता डिंपल यादव ने वाराणसी में एक संयुक्त रोड शो किया। दुर्गाकुंड से लंका तक लगभग तीन किलोमीटर लंबा यह रोड शो, रविदास मंदिर पर समाप्त हुआ। इस दौरान दोनों ने कालभैरव मंदिर में दर्शन कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

5. पल्लवी पटेल और ओवैसी की संयुक्त रैली
अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मिलकर एक नया राजनीतिक गठबंधन ‘पीडीएम’ बनाया। दोनों ने वाराणसी में एक साझा जनसभा की, लेकिन उन्हें यहां ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी। यह गठबंधन मुख्य रूप से सपा से अलग हुए मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा था।

6. आईआईटी बीएचयू मामला: विपक्ष का हमला
वर्ष की शुरुआत में आईआईटी बीएचयू में एक छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने वाराणसी का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। आरोपी के भाजपा से जुड़े होने के कारण विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। हालांकि, आरोप साबित होने पर पार्टी ने आरोपी को निष्कासित कर दिया। इस मामले की गूंज लखनऊ तक सुनाई दी।

7. डॉ. अंबेडकर पर विवादित बयान के विरोध में प्रदर्शन
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर पर दिए गए कथित बयान को लेकर वाराणसी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इसमें सपा-कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने गृहमंत्री के बयान के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके साथ ही इस बयान के विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ के छात्र भी एकत्रित हुए।

8. श्याम देव राय चौधरी का निधन
भाजपा के वरिष्ठ नेता और वाराणसी दक्षिण से सात बार विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी ‘दादा’ का निधन पार्टी और शहर के लिए एक बड़ी क्षति साबित हुआ। उनके अंतिम संस्कार में सभी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। दादा का व्यक्तित्व और उनकी सरलता उन्हें सभी के बीच लोकप्रिय बनाती थी।

9. मुख्तार अंसारी की मौत: पूर्वांचल में अलर्ट
माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से मौत के बाद वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। जुमे की नमाज के दौरान शहर की मस्जिदों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। यह घटना माफियाराज के अंत का प्रतीक बन गई।

10. यूपी कॉलेज: वक्फ बोर्ड की नोटिस पर विवाद
यूपी कॉलेज को छह साल पुरानी वक्फ बोर्ड की नोटिस मिलने के बाद विवाद ने तूल पकड़ा। छात्रों ने परिसर में मजार के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने और बाहरी व्यक्तियों की एंट्री बैन करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। अंततः पुलिस को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिसर में बाहरी लोगों की एंट्री प्रतिबंधित करनी पड़ी।

11. नमो घाट का उद्घाटन और नई योजनाएं
देव दीपावली के अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने वाराणसी के ‘नमो घाट’ का उद्घाटन किया। यह विश्व का सबसे बड़ा घाट है और इसकी लंबाई करीब 1.5 किलोमीटर है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की और यूपी कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की घोषणा की।

12. रोपवे और अमूल बनास डेयरी: नई परियोजनाएं
वाराणसी में शहरी परिवहन को बेहतर बनाने के लिए रोपवे परियोजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई इस परियोजना की आधारशिला पर काम तेजी से चल रहा है। हालांकि, तकनीकी कारणों से इसका शुभारंभ 2025 तक टाल दिया गया है। साथ ही, काशी में अमूल बनास डेयरी के शुभारंभ से दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

2024 में वाराणसी ने राजनीति से लेकर सांस्कृतिक और विकास परियोजनाओं तक, हर क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत किया। यह वर्ष वाराणसी की जीवंतता और इसके बढ़ते महत्व का प्रमाण रहा।

