Varanasi: काशी में करीब 13 दिनों तक लगातार घटने के बाद गंगा के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। शनिवार से शुरू हुआ जलस्तर का बढ़ाव रविवार को भी जारी रहा। पानी धीरे-धीरे घाटों की सीढ़ियों की ओर बढ़ने लगा है। इससे गंगा स्नान और तर्पण के लिए घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई है। घाटों पर पहले से जमा सिल्ट और कीचड़ के कारण फिसलन भी बढ़ गई है। तीर्थ पुरोहितों और नाविक समाज ने घाटों की सीढ़ियों पर जमा सिल्ट को जल्द हटाने की मांग की है।
गंगा (Varanasi) के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार शनिवार को करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। इस वर्ष पहली बार जलस्तर में इतनी तेज गति से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते दिनों हुई भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा है। अचानक बढ़ाव शुरू होने से घाटों और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वाराणसी (Varanasi) में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन जिस गति से पानी बढ़ रहा है, उससे घाटों पर इसका असर दिखाई देने लगा है। आयोग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले सात दिनों में जलस्तर में करीब 3.96 मीटर तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। ऐसे में घाटों और तटवर्ती इलाकों में दोबारा पानी पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
सितंबर में पहले भी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा था पानी
सितंबर के पहले पखवाड़े में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के आसपास पहुंच गया था। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार 12 सितंबर को वाराणसी (Varanasi) में गंगा का जलस्तर 70.83 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद पानी लगातार घटने लगा। 15 सितंबर को जलस्तर 68.72 मीटर दर्ज किया गया था और उस समय पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। 20 सितंबर को जलस्तर 70.10 मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद भी गिरावट का क्रम बना रहा, लेकिन करीब 13 दिन बाद अब गंगा का रुख फिर बढ़ाव की ओर हो गया है।
Varanasi सिल्ट से बढ़ी घाटों पर परेशानी
गंगा (Varanasi) के घटने के दौरान घाटों की सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों में बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा हो गई है। अब पानी दोबारा बढ़ने के साथ कई स्थानों पर सीढ़ियां और किनारे की जगहें पानी की चपेट में आने लगी हैं। स्नान और तर्पण के लिए पहुंचने वाले लोगों को कीचड़ और फिसलन के बीच घाट तक पहुंचना पड़ रहा है। तीर्थ पुरोहितों और नाविकों का कहना है कि घाटों पर जमा सिल्ट को समय रहते हटाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और हादसों की आशंका को भी कम किया जा सके।

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गंगा (Varanasi) के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि फिलहाल स्थिति खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि पर प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पानी की रफ्तार और जलस्तर की स्थिति से तय होगा कि घाटों और तटवर्ती इलाकों पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।

