काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 85 वर्षीय पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी को लेकर सामने आया विवाद अब गंभीर सवालों के घेरे में है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि आईसीयू में उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ मारा गया। दूसरी तरफ बीएचयू प्रशासन का कहना है कि मामले की प्रारंभिक जांच में मारपीट की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर आईसीयू में उस रात हुआ क्या था?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित कर दी गई है। वहीं विवाद के बीच प्रो. लाहिड़ी की देखरेख कर रहे डॉ. अरविंद पांडेय को जिम्मेदारी से हटा दिया गया है।
29 अगस्त की रात की है घटना
परिजनों के मुताबिक, 29 अगस्त की रात BHU के आईसीयू में प्रो. टीके लाहिड़ी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। परिवार को घटना की जानकारी 1 सितंबर को विभागीय स्तर से मिलने का दावा किया गया है। इसके बाद परिजनों ने प्रो. लाहिड़ी की चोटों से संबंधित फोटो और वीडियो प्राप्त किए और विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी।
परिजनों ने कार्डियोथोरेसिक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय पर दुर्व्यवहार और थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष मेडिकल जांच की मांग की है।
सुरक्षा पर भी उठे कई सवाल
गौरतलब यह है कि अगर यह आरोप सही साबित होता है तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है, क्योंकि सवाल सिर्फ एक मरीज के साथ कथित दुर्व्यवहार का नहीं, बल्कि BHU अस्पताल के आईसीयू जैसे संवेदनशील स्थान पर भर्ती एक बुजुर्ग मरीज की सुरक्षा का भी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वहीं BHU प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही नहीं माना है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत कुमार के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद आईएमएस निदेशक के साथ उन्होंने आईसीयू जाकर प्रो. लाहिड़ी की स्थिति देखी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराई गई।
डॉ. अरविंद पांडेय को जिम्मेदारी से हटाया गया
वहीं आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने भी मारपीट की घटना से इनकार किया है। इतना ही नहीं, BHU प्रशासन एक तरफ प्रथम दृष्टया मारपीट की पुष्टि नहीं होने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी तरफ विवाद बढ़ने के बाद प्रो. लाहिड़ी की देखरेख कर रहे डॉ. अरविंद पांडेय को जिम्मेदारी से हटा दिया गया।
अब प्रो. लाहिड़ी की देखरेख की जिम्मेदारी चेस्ट एंड टीबी विभाग के डॉ. अतुल तिवारी को दी गई है। इसके अलावा दूसरे विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भी उनकी निगरानी कर रही है। क्या यह फैसला सिर्फ विवाद को देखते हुए लिया गया या जांच के दौरान कोई और तथ्य सामने आया? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
BHU के चीफ प्रॉक्टर भी जांच समिति में शामिल
मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें BHU के चीफ प्रॉक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी काशी को शामिल किया गया है। मामला सामने आने के बाद बीएचयू परिसर में भी इसका असर देखने को मिला। छात्रों ने विश्वनाथ मंदिर के बाहर प्रदर्शन करते हुए प्रो. टीके लाहिड़ी के लिए न्याय और उनकी सुरक्षा की मांग की।
वहीं मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी हलचल बढ़ने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में मामला आने के बाद कई मंत्रियों के भी BHU अस्पताल पहुंचने का भी उल्लेख सामने आया है।
प्रो. टीके लाहिड़ी ने की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
इन तमाम आरोपों और विवाद के बीच सोमवार को प्रो. टीके लाहिड़ी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बहन, जीजा और भतीजी से बातचीत की। करीब एक मिनट की इस बातचीत में वह मुस्कुराते और कई बार हंसते नजर आए। परिवार के लिए यह पल राहत देने वाला रहा।
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प्रो. टीके लाहिड़ी का मामला अब सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ परिवार के गंभीर आरोप हैं, दूसरी तरफ BHU प्रशासन का दावा है कि प्रारंभिक जांच में मारपीट की पुष्टि नहीं हुई।

