Varanasi: काशी में भक्ति और कला का संगम सदियों से देखने को मिलता रहा है। यहां साधना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि कला, संगीत, चित्रकारी और मूर्तिकला के माध्यम से भी आराध्य तक पहुंचने का मार्ग बनती है। इसी परंपरा को अपनी अनोखी चित्रकला के माध्यम से जीवंत कर रहे हैं अस्सी क्षेत्र निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार एवं चित्रकार विजय कुमार। भगवान गणेश के अनन्य भक्त विजय अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर महज कुछ ही क्षणों में कागज या कैनवास पर गणपति की सुंदर और सटीक आकृति उकेर देते हैं।

गणेश पुजा के अवसर पर जब काशी के विभिन्न मंदिरों और घरों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं विजय कुमार के लिए (Varanasi) चित्रकारी ही गणपति की आराधना का माध्यम बन जाती है। वे आंखों पर पट्टी बांधकर मन ही मन भगवान गणेश के मंत्र का जाप करते हैं और ध्यान में अपने आराध्य की छवि को रखकर उनकी आकृति कैनवास पर उतारते हैं। उनकी यह कला देखने वालों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होती।

आंखें बंद, हाथों में कला और मन में गणपति
विजय कुमार बताते हैं कि उनके लिए चित्रकारी केवल कला नहीं, बल्कि साधना है। जब वे भगवान गणेश का चित्र बनाना शुरू करते हैं तो उनका पूरा ध्यान अपने आराध्य पर केंद्रित हो जाता है। आंखें खुली हों या बंद, गणपति उनके हृदय में विराजमान हैं। इसी भाव के साथ वे बंद आंखों से भी गणेश की आकृति को कागज पर उतार देते हैं।कभी एक चित्र तैयार करने में एक-दो मिनट लगते हैं तो कई बार वे महज 20 से 30 सेकंड में भी गणेश की आकृति बना देते हैं। उनका कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक भगवान गणेश की कृपा है। वे इसे बप्पा की सेवा और अपनी कला-साधना मानते हैं।
Varanasi बचपन से मूर्ति और चित्र बनाने का सिलसिला
विजय कुमार के परिवार में कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण का कार्य होता रहा है। पत्थरों को तराशकर मूर्तियां बनाने के साथ ही उन्होंने बचपन से चित्रकारी में भी रुचि दिखाई। शुरुआत में वे खुली आंखों से भगवान गणेश के चित्र बनाया करते थे। बाद में एक प्रसंग ने उनकी कला को नया रूप दे दिया।

बताया जाता है कि उनके भतीजे ने एक बार मजाक में उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर चित्र बनाने की चुनौती दी। विजय ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने लगातार अभ्यास किया और धीरे-धीरे बंद आंखों से भगवान गणेश की आकृति बनाने में दक्षता हासिल कर ली। पिछले कई वर्षों से वे इसी अनोखी कला के माध्यम से गणपति की आराधना कर रहे हैं।
गणेश महोत्सव में 108 चित्र बनाने का संकल्प
गणेश महोत्सव के पहले दिन विजय कुमार (Varanasi) का विशेष संकल्प रहता है। वे बंद आंखों से भगवान गणेश की 108 पेंटिंग बनाकर अपनी आराधना शुरू करते हैं। चित्र बनाते समय वे गणेश मंत्र का जाप करते हैं और प्रत्येक चित्र को अपने आराध्य को समर्पित करते हैं।उनका कहना है कि जिस प्रकार भक्त माला के 108 मनकों के माध्यम से भगवान का स्मरण करते हैं, उसी प्रकार वे 108 चित्र बनाकर गणपति का ध्यान करते हैं। उनके लिए यह केवल चित्रों की संख्या पूरी करना नहीं, बल्कि निरंतर साधना और भक्ति का हिस्सा है।

लिम्का बुक में दर्ज हो चुकी है कला
विजय कुमार की इस अनोखी चित्रकला ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई है। उनकी कला के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है। उन्होंने लगातार कई घंटों तक भगवान गणेश की पेंटिंग बनाने का प्रदर्शन किया है। (Varanasi) काशी के विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों में उन्होंने चित्र बनाए हैं और काशी के 56 विनायकों की चित्रकला भी तैयार की है।उनकी बनाई पेंटिंग की प्रदर्शनी देश के विभिन्न हिस्सों में लग चुकी है। कला और भक्ति के अनूठे संगम के कारण विजय को कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। (Varanasi) उन्हें ‘काशी रत्न’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

‘जब तक बप्पा की इच्छा, तब तक चलता रहेगा चित्रकारी का सिलसिला‘
विजय कुमार (Varanasi) कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन के करीब 35 वर्ष चित्रकला को समर्पित किए हैं। बंद आंखों से लाखों से अधिक भगवान गणेश की पेंटिंग बनाने का दावा करते हुए वे कहते हैं कि जब तक बप्पा की इच्छा होगी, तब तक उनकी यह कला साधना जारी रहेगी।
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काशी (Varanasi) की गलियों में जहां एक ओर मंदिरों की घंटियां और गणपति के जयकारे सुनाई देते हैं, वहीं विजय कुमार की उंगलियां कैनवास पर गणपति की आकृति उकेरकर भक्ति का अलग ही स्वरूप प्रस्तुत करती हैं। उनके लिए रंग और रेखाएं महज चित्र बनाने के साधन नहीं, बल्कि भगवान गणेश के चरणों में अर्पित की जाने वाली कला-अंजलि हैं। यही कारण है कि उनकी बंद आंखों से बनाई गई गणेश की आकृतियां देखने वालों को कला के साथ-साथ भक्ति की शक्ति का भी अहसास कराती हैं।

