वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय BHU में शनिवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं और चीफ प्रॉक्टर के बीच तीखी बहस का मामला सामने आया। एबीवीपी की बीएचयू इकाई के कार्यकर्ता विभिन्न छात्रहित के मुद्दों और हाल में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर जवाब मांगने चीफ प्रॉक्टर कार्यालय पहुंचे थे। छात्रों का आरोप है कि उन्हें कई घंटे तक कार्यालय में इंतजार कराया गया, लेकिन चीफ प्रॉक्टर उनसे मिलने नहीं पहुंचे। विरोध के बाद वह छात्रों से बातचीत के लिए पहुंचे तो दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हो गई।
बैठक के दौरान हुई बहस का एक वीडियो भी सामने आया है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चीफ प्रॉक्टर (BHU) ने बातचीत के दौरान छात्रों से मोबाइल फोन बाहर रखने को कहा। इस पर भी छात्रों ने आपत्ति जताई। आरोप है कि बातचीत के दौरान चीफ प्रॉक्टर छात्रों पर तेज आवाज में बात करने लगे, जिसके बाद मामला गरमा गया। कुछ देर की बहस के बाद चीफ प्रॉक्टर वहां से बाहर चले गए।
कार्यक्रम के आयोजन को लेकर उठाए सवाल
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों बीएचयू परिसर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा से जुड़े एक कार्यक्रम के आयोजन को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि जिस (BHU) हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसकी अनुमति छात्र कार्यक्रम के आधार पर ली गई थी, जबकि वहां बड़ी संख्या में बाहरी लोग मौजूद थे।
एबीवीपी का दावा है कि संबंधित (BHU) हॉल का निर्धारित शुल्क करीब 55 हजार रुपये है, लेकिन कार्यक्रम के लिए कोई शुल्क जमा नहीं कराया गया। संगठन ने इस मामले में अनुमति देने की प्रक्रिया, बाहरी लोगों के प्रवेश और हॉल शुल्क को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है।इसी सहित सुरक्षा, बाहरी लोगों की आवाजाही और छात्रहित से जुड़े कई मुद्दों को लेकर कार्यकर्ता चीफ प्रॉक्टर से मिलने पहुंचे थे।
एबीवीपी बोली- संवाद की लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत हो
बीएचयू (BHU) इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि अभाविप का स्पष्ट मत है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद की स्वस्थ एवं लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत होनी चाहिए। विद्यार्थियों के वास्तविक प्रश्नों को दबाने के बजाय उन्हें सुनकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल की कई घटनाएं चीफ प्रॉक्टर के रवैये को लेकर सवाल खड़े करती हैं। छात्रहित के मुद्दों पर अपनी बात रखने वाले विद्यार्थियों के साथ जिस तरह व्यवहार किया जा रहा है, वह विश्वविद्यालय (BHU) के लोकतांत्रिक वातावरण के लिए उचित नहीं है।
एबीवीपी की प्रमुख मांगें
• छात्र कार्यक्रम के नाम पर बाहरी लोगों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम को अनुमति देने और करीब 55 हजार रुपये के हॉल शुल्क के भुगतान नहीं होने के मामले में जवाब और जांच की मांग।
• विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों और वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने की मांग।
• परिसर में काफिले, हूटर और तेज रफ्तार वाहनों से विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग।
• परिसर में प्रवेश की स्पष्ट नीति, पहचान सत्यापन और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग।
• संवेदनशील क्षेत्रों और छात्रावासों की ओर जाने वाले मार्गों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और CCTV कैमरे लगाने की मांग।
• पूरे परिसर का सुरक्षा ऑडिट कराकर उसके आधार पर CCTV, प्रकाश व्यवस्था और नियमित सुरक्षा गश्त बढ़ाने की मांग।
• पार्क में दिन-रात सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, नियमित गश्त और CCTV निगरानी की मांग।
• VT क्षेत्र समेत दुकानों के आसपास CCTV लगाने और उनकी नियमित निगरानी की मांग।
• चाय, नाश्ता, छोला-समोसा समेत खाद्य सामग्री की निर्धारित दरें दुकानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराने की मांग।
• FIR, हॉस्टल डिबारमेंट और समितियों के गठन जैसे मामलों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र समीक्षा की मांग।
• किसी भी छात्र के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों, प्रमाणों और निर्धारित नियमों के आधार पर करने तथा अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देने की मांग।
एक ही विश्वविद्यालय परिसर में IIT-BHU के सुरक्षाकर्मी और BHU के सुरक्षाकर्मी समान रूप से लगभग 8 घंटे की ड्यूटी करते हैं, लेकिन दोनों के वेतन में अंतर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार IIT-BHU में सुरक्षाकर्मियों को लगभग ₹30,000 तथा BHU में लगभग ₹22,000 मासिक वेतन प्राप्त होता है।
समान परिसर में समान प्रकृति का कार्य करने वाले सुरक्षाकर्मियों के साथ ऐसा अंतर क्यों है, विश्वविद्यालय प्रशासन को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
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इसके साथ ही विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूर्व सैनिकों की सेवाओं को प्राथमिकता देने की स्थापित परंपरा रही है। ऐसे में कथित रूप से 25 प्रतिशत सिविलियन सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति का निर्णय सुरक्षा व्यवस्था और परिसर की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार योग्य है। अभाविप की मांग है कि सुरक्षा व्यवस्था में अनुभवी पूर्व सैनिकों की भूमिका को कमजोर न किया जाए तथा किसी भी नई नियुक्ति नीति को पारदर्शी, सुरक्षित और छात्रहित में बनाया जाए।

