लखनऊ। किसी जमाने में दस्यु प्रभावित होने का दंश झेलने वाले पाठा क्षेत्र के सकरौंहा गांव के निवासी युवा लेखक डॉ उदित नारायण पांडेय ने एक बार फिर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। रविवार को डॉ उदित नारायण पांडेय को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा प्रदेश की राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में जयशंकर प्रसाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
जिले की मानिकपुर तहसील के सकरौंहा गांव के निवासी डॉ उदित नारायण पांडेय वर्तमान समय में लखनऊ में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, उनको पूर्व में उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक कलाकार के रूप में भी पंजीकृत किया गया था। सांस्कृतिक अभिरुचि वाले डॉ उदित नारायण पांडेय कवि व गायक भी हैं। उनकी सड़क सुरक्षा, कोरोना वायरस व मतदाता जागरूकता, जनसंख्या नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण सहित अनेक कवितायें/गीत व लघु फिल्म अत्यंत लोकप्रिय हैं। उनके सड़क सुरक्षा संबंधी गीतों और फिल्मों को प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रसारित करने के आदेश परिवहन विभाग व यातायात निदेशालय से निर्गत किए गए हैं। इस बार उन्हें पुस्तक, जागो रे जागो, के लिए जयशंकर प्रसाद पुरस्कार दिया गया है। जिसके तहत मुख्य सचिव उ प्र, दुर्गा शंकर मिश्रा के कर कमलों से कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि का चेक , अंग वस्त्र व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बुन्देलखण्ड पर उन्होने अत्यंत सारगर्भित बुन्देलखण्ड वैभव नामक कविता लिखी। डॉ पांडेय ने ये कविताएं न केवल लिखी हैं बल्कि बहन ,पत्नी डा प्रतीक्षा पाण्डेय व बच्चों अभिज्ञान व अभिनव के साथ मिलकर संगीत बद्ध भी किया है। उनकी कविताओं को लोगों द्वारा बेहद पसंद किया जाता है।
sudha jaiswal