विश्व निद्रा दिवस 17 मार्च पर विशेष लेख

लखनऊ। अच्छी नींद अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है परन्तु आज की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी लगातार चलती मशीन का रूप बनती जा रही है। इसका सबसे अधिक प्रभाव हमारी नींद एवं स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बढ़ते मोटापे एवं गलत खान-पान के कारण भी नींद सम्बन्धी रोग लगातार बढ़ रहे हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि वे लोग जिनकी शर्ट का साइज 42 इंच से ऊपर है, उनको खरार्टे आते हैं एवं वे आॅबस्ट्रक्टिव स्लीप एप्नीया के रोगी हो सकते हैं। सोते समय खरार्टे आने के साथ ही नींद टूटने का कारण स्लीप एप्निया हो सकता है। यह एक ऐसी गंभीर बीमार है जो डायबिटीज, हार्ट-अटैक, ब्लड-प्रेशर के साथ ही याददाश्त कम होने जैसे रोगों का कारण बन सकती है। सोते समय सांस लेने के रास्ते में अवरोध के कारण यह परेशानी होती है। यह एक लाइफ-स्टाइल डिजीज है। इससे बचने के लिए सेहत का ध्यान रखना चाहिए और अपने वजन को कन्ट्रोल में रखना चाहिए। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त ने शुक्रवार केयह जानकारी दी कि फैट या मांस बढ़ने के कारण सांस नली का रास्ता संकुचित हो जाता है। ऐसे में सोते समय नली बंद हो जाती है और सांस में दिक्कत के कारण शरीर में आॅक्सीजन की कमी होने लगती है। दस सेकंड तक सांस बंद रहने पर नींद टूट जाती है। यह समस्या लगातार रहने से नींद पूरी नहीं होती और शरीर के अंगों को भी आॅक्सीजन नहीं मिल पाती। दिल को पूरी आक्सीजन न मिलने पर हार्ट-अटैक, ब्रेन में आॅक्सीजन की कमी होने से फालिज और ब्रेन स्ट्रोक तक का खतरा हो सकता है। देश में हुए एक शोध के अनुसार भारत में 30 वर्ष की उम्र से ऊपर के लोगों में से 40 प्रतिशत को खरार्टे आते हैं। इनमें से दिल्ली में हुए एक शोध के अनुसार 13 प्रतिशत को आबस्ट्रक्टिव स्लीप एप्नीया की बीमारी पायी गयी। देश में इस रोग से ग्रसित लोगों की संख्या लगभग 18 करोड़ है। बार-बार सर्दी- जुकाम होने के साथ ट्रॉन्सिल बढ़ने पर बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। डा0 सूर्यकान्त के अनुसार लापरवाही पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
sudha jaiswal

