शहर में रोज सैकड़ों किंवटल आम की बिक्री,
व्यापारियों को बरसात का इंतजार,
आम के आगे अन्य फलों का बाजार सिमटा,
लखनऊ। फलों का राजा कहा जाने वाला आम इस समय शहर की मण्डियों में राज कर रहा है।हर दिल अजीज आम की मण्डी में उतरते ही मानों सारे फलों की मिठास ही खत्म हो गयी है।एकदम से शहर की मण्डियों में आम के मुकाबले सारे फलों की बिक्री फीकी पड़ गयी है। दुबग्गा फल एवं सब्जी मण्डी,अस्थाई बुधेश्वर मण्डी के व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल की इस बार आम की पैदावार बहुत कम है।लखनऊ शहर में ही हर रोज इन मण्डियों से लगभग एक हजार किंवटल तक आम की बिक्री हो जाती है।इसके अलावा अन्य जिलों एवं प्रदेशों में इन मण्डियों से हजारों टन आम भेज जाता है।

व्यापारियों के अनुसार इतनी अधिक मात्रा में होने वाली आम की खपत से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को आम कितना ज्यादा पसंद है।अभी डाल का पका दशहरी आम मण्डियों में बहुत कम मात्रा में आ रहा है।मण्डियों में अभी पाल की पकी दशहरी और कच्ची दशहरी सहित अन्य आम आ रहे है।बताया जाता है कि 15 जून से डाल की पकी दशहरी की भर पूर मण्डियों में आवक होगी।
व्यापारियों का कहना है कि जबतक एक अच्छी बरसात नही हो जाती है,तब तक पेड़ का पका डाल का दशहरी आम को खाने का वह जायका नहीं मिलेगा।बरसात होने के बाद ही आम रशीला और जायकेदार स्वादिष्ट होगा।अभी डाल का दशहरी आम खाने पर फीके पन का स्वाद है।

कच्ची दशहरी का रेट लगभग 1100 से 1300 रुपए प्रति कैरेट की दर से मण्डियों में बिक रही है।जबकि पक्की दशहरी डाल की प्रति कैरेट लगभग 1500 से 1800 रुपए की दर से बिक्री हो रही है।पाल की दशहरी 700 से 900 रुपए तक बिक रही है।व्यापारियों का कहना है कि जब से मण्डियों में आम की आमद हुई है,तब से अन्य फलों की बिक्री बहुत कम हो गयी है। दुबग्गा मण्डी के आढ़ती मयंक यादव लाला व अरुण द्विवेदी बताते है कि इलाके में फसल कमजोर होने के बावजूद मण्डियों में आम की रोज भरपूर आमद हो रही है,फसल कमजोर होने की वजह से इस बार यह कारोबार ज्यादा लम्बे समय तक नही चलेगा।

बुधेश्वर में फल का ढेला लगाने वाले राज कुमार रावत बताते हैं कि जब से बाजार में पका आम आ गया है तब से अन्य फलों की बिक्री न के बराबर रह गई है।इसकी वजह वह बताते है कि आम लोगों को अन्य फलों से सस्ता पड़ता है साथ ही यह कुछ दिनों के लिए ही बाजार में उपलब्ध हो पाता है। जबकि अन्य फल लगभग हर समय बाजार में मौजूद रहते हैं।
sudha jaiswal

