वाराणसी। पाक्सो एक्ट (POCSO) का निर्माण नाबालिग लड़कियों पर यौन शोषण के अपराधों पर लगाम लगाने के लिए वर्ष 2012 में किया गया था. बावजूद इसके नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण की खबरें आती ही रहती हैं.
विशेष न्यायाधीश पाक्सो (POCSO) अनुतोष कुमार शर्मा की अदालत ने कपसेठी थाने के पाक्सो और सामूहिक दुराचार के मामले में दो अभियुक्तों सुरेन्द्र पटेल और श्रवण कुमार बंकू को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सुरेन्द्र को एक लाख 10 हजार और श्रवण को एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। अदालत के फैसले के अनुसार, इसमें से 80 फीसदी रकम पीड़िता को दी जाएगी।

POCSO: परिवार की गैर हाजिरी में किया दुष्कर्म
विशेष लोक अभियोजक मधुकर उपाध्याय के मुताबिक 3 अगस्त 2015 को पीड़िता के पिता ने तहरीर में कहा कि वह पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था। इसी दौरान पड़ोसी सुरेन्द्र पटेल, सहयोगी श्रवण पटेल को वादी के दरवाजे पर खड़ा कर चाकू की नोक पर उसकी 17 वर्षीय पुत्री के साथ एक सप्ताह तक दुष्कर्म (POCSO) करता रहा। साथ ही किसी को बताने पर जान मारने की धमकी देता रहा। दर्द के कारण पीड़िता ने मां को यह बात नहीं बताई. जब एक सप्ताह बाद वह बीमार हुई तब घटना की जानकारी दी गई. जिसके बाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

