Varanasi-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-31 (NH-31) के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, दोष दायित्व अवधि (डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड) में हुए कथित अवैध भुगतानों, टोल राजस्व में संभावित हेराफेरी, सड़क सुरक्षा में लापरवाही तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की भूमि पर अवैध कब्जों के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NHAI के सतर्कता विभाग ने शिकायतकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता संजय कुमार सिंह, निवासी राजवारी (वाराणसी), से शिकायत की पुष्टि, वैध पहचान पत्र तथा उपलब्ध साक्ष्य मांगे हैं।
सतर्कता विभाग का पत्र बना चर्चा का विषय
महाप्रबंधक (सतर्कता) संजय वर्मा द्वारा 26 मई 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि विभाग को 4 अप्रैल 2026 को NH-31 के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी। चूंकि NHAI की नीति के अनुसार अनाम अथवा छद्म नाम से प्राप्त शिकायतों पर विचार नहीं किया जाता है, इसलिए शिकायतकर्ता (Varanasi) से यह पुष्टि करने को कहा गया कि शिकायत वास्तव में उन्हीं द्वारा की गई है। साथ ही सरकार द्वारा जारी वैध पहचान पत्र की प्रति और उपलब्ध दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
संजय कुमार सिंह ने अपने जवाब में कहा है कि वह पूर्व में भी अपना आधार कार्ड उपलब्ध करा चुके हैं, लेकिन शिकायतों पर अब तक की गई कार्रवाई अथवा जांच की स्थिति से उन्हें अवगत नहीं कराया गया। उन्होंने पुनः अपना पहचान पत्र (Varanasi) भेजते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
125 करोड़ रुपये के कथित अवैध भुगतान का आरोप
शिकायत (Varanasi) में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य पूरा होने और परियोजना हस्तांतरित किए जाने के बाद भी सड़क के कई हिस्सों में टूट-फूट, घिसाव और दरारें दिखाई दीं। सामान्यतः ऐसी स्थिति में मरम्मत कार्य का खर्च निर्माणकर्ता एजेंसी द्वारा वहन किया जाना चाहिए था, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोष दायित्व अवधि के दौरान वाराणसी से गाजीपुर खंड में प्रतिवर्ष लगभग 25 करोड़ रुपये तक के भुगतान किए गए। पांच वर्षों में यह राशि लगभग 125 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। उन्होंने इन भुगतानों की वैधता और अनुबंधीय प्रावधानों की जांच कराने की मांग की है।
Varanasi: टोल प्लाजा पर राजस्व हानि की आशंका
शिकायत में कैथी और राजवारी (Varanasi) के बीच स्थित टोल प्लाजा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि रात्रि के समय बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रक टोल प्लाजा के दोनों ओर खड़े कर दिए जाते हैं तथा टोल वसूली में अनियमितताओं के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि आरोप सत्य पाए गए तो सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो सकती है।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि टोल प्लाजा एवं उसके आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग (Varanasi) पर ओवरलोड वाहनों के खड़े रहने से यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों के कारण क्षेत्र में कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें अनेक लोगों की मौत हुई तथा कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शिकायतकर्ता ने इसे जनसुरक्षा और मानव जीवन से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
NHAI की भूमि पर अवैध कब्जों की भी मांग
संजय कुमार सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भूमि पर कथित अवैध कब्जों और वहां संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार लोगों (Varanasi) के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरटीआई कार्यकर्ता ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, टोल प्लाजा संचालन, राजस्व संग्रहण, ओवरलोड वाहनों की आवाजाही, सड़क सुरक्षा व्यवस्था, भूमि पर अवैध कब्जों तथा दोष दायित्व अवधि में हुए कथित भुगतानों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय सतर्कता जांच कराने की मांग की है। साथ ही शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई और जांच की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने का भी अनुरोध किया है।अब निगाहें NHAI सतर्कता विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं और जनसुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ सकता है।



