वाराणसी (Varanasi) में बारिश शुरू होते ही मकान गिरने की खबरें आने लगी है। जानकारी के मुताबिक, सिटी में 404 के करीब भवन जर्जर है। इनमें 187 जर्जर भवनों वाला क्षेत्र कोतवाली डेंजर जोन बन चुका है। लगातार एक से दो दिन बारिश हुई तो सबसे अधिक हादसे की आशंका इसी जोन में रहती है। इसके बाद दशाश्वमेध जोन है। बारिश शुरू हो चुकी है तो जर्जर भवन को लेकर खतरा मंडराने लगा है। हर बार की तरह इस बार भी नगर निगम (Varanasi) जर्जर भवन को लेकर अलर्ट मोड में है। लेकिन, अफसरों की लापरवाही के कारण आसपास के लोग टेंशन में जिंदगी जी रहे है।
बारिश शुरू हो चुकी है। गली-मुहल्लों में जर्जर मकान को गिराने के लिए कई बार लोगों ने नगर निगम (Varanasi) में शिकायत की, लेकिन मामला कोर्ट में होने की वजह से यथावत पड़ा है। खतरा तब बढ़ जाता है जब बारिश होती है। लोगों में भय बना रहता है कि कहीं जर्जर मकान गिर गया तो जान-माल का नुकसान होना तय है। साल भर इन जर्जर भवनों की स्थिति हर किसी को दिखाई देती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और नगर निगम का इन जर्जर मकानों की तरफ कोई ध्यान नहीं जाता। ऐसे में ये मकान बारिश के दिनों में लोगों की जान को संकट में डाल देते हैं।
Varanasi: किसी का पिलर तो किसी के घर का लटक रहा छत
नगर निगम (Varanasi) के अधिकारियों की मानें तो शहर में जर्जर भवनों की संख्या करीब 404 है। यह वह भवन हैं जो कभी भी गिर सकते हैं। इसके बाद भी नगर निगम इन भवनों को ध्वस्त कराने के बजाय हादसे का इंतजार कर रहा है। कोतवाली क्षेत्र में सबसे अधिक जर्जर भवन हैं। गली-मुहल्ले में इन जर्जर भवन के हालात काफी खराब हैं। किसी की दीवार एकदम जर्जर है तो किसी का पिलर एक तरफ गिरकर पड़ा हुआ है तो किसी का छत लटक रहा है।
मकान मालिक और किरायदार के जंग में ध्वस्तीकरण पर रोक
नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो जर्जर भवन में कई बार ऐसा होता है कि मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होता है। ऐसे में नगर निगम दोनों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने और उसे ध्वस्त कराने का आदेश देता है। कई बार ऐसा होता है कि इसके बाद भी भवन नहीं गिराए जाते हैं, तो इंजीनियरिंग विभाग (Varanasi) द्वारा उसका ध्वस्तीकरण कराया जाता है। इसके लिए कई बार नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन लोग कोर्ट का सहारा लेकर रोक देते हैं।
कानूनी अड़चनें के चलते गिरने लगे जर्जर मकान
ऐसे जर्जर मकानों को गिराने में कानूनी अड़चनें भी आती हैं। ऐसे में कोर्ट (Varanasi) के आदेश के बाद नगर निगम ऐसे भवनों के ध्वस्तीकरण का काम करता है, तब तक हादसा न हो इसके लिए दोनों पक्ष को घर खाली करने के निर्देश दिया जाता है।