Morche Bandi: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रसंघ भवन में मंगलवार को ‘मोर्चे बंदी’ उपन्यास का औपचारिक विमोचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद छात्राओं ने अतिथियों को पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
यह उपन्यास महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र प्रताप द्वारा लिखा गया है। पुस्तक का उद्देश्य 1967-68 में हुए ‘अंग्रेज़ी हटाओ आंदोलन’ को पुनः जनमानस तक पहुँचाना है। लेखक ने अपने लेखन में उस दौर के संघर्ष, विचारधारा और छात्र आंदोलनों की गूंज को विस्तार से वर्णित किया है।
इस दौरान प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने विभिन्न देशों के छात्र आंदोलनों और उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल भाषा का सवाल नहीं था, बल्कि छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों के बीच वैचारिक और राजनीतिक समन्वय का प्रतीक भी था।
Morche Bandi: अतिथियों की समीक्षा और विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता BHU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मोहन प्रकाश ने की। उन्होंने पुस्तक (Morche Bandi) की समीक्षा करते हुए छात्रों की भूमिका को रेखांकित किया। वरिष्ठ समाजवादी विचारक विजय नारायण ने बताया कि किस तरह छात्र आंदोलनों ने सरकार तक अपनी आवाज़ पहुँचाई और कैसे राजनारायण ने जेल में बंद छात्रों को नई दिशा दी।
प्रो. दीपक मालिक ने छात्र राजनीति की उपयोगिता पर अपने विचार रखे, जबकि BHU हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बलराज पांडेय ने विश्वविद्यालय की समसामयिकता और आंदोलनों के संदर्भ में पुस्तक (Morche Bandi) को महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर JNU भाषा विज्ञान केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ओम प्रकाश सिन्हा, कुंवर सुरेश प्रताप, अशोक पांडेय, डॉ. सूबेदार सिंह और राधेश्याम सिंह समेत कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

