Dog News: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन किया है। इस आदेश ने डॉग लवर्स और एनिमल एक्टिविस्ट्स को बड़ी राहत दी है। इस फैसले से देशभर के पशुप्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसी कड़ी में वाराणसी में भी पशु-प्रेमियों ने इस आदेश का स्वागत किया और इसे इंसान और जानवर के सह-अस्तित्व की दिशा में इसे बेहतरीन कदम बताया।
पशुप्रेमियों ने जताई उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के इस संशोधित आदेश का स्वागत करते हुए डॉग लवर ऋतु ने कहा कि यह फैसला उन सभी लोगों के लिए नई उम्मीद है जो बेसहारा जानवरों (Dog News) की सेवा में जुटे रहते हैं। अब समाज में यह संदेश जाएगा कि हर जानवर की देखभाल इंसानों की जिम्मेदारी है।
वहीं वाराणसी की रहने वाली स्वाती बलानी, जिन्हें स्थानीय लोग मज़ाकिया अंदाज़ में “मिनी जू की मालकिन” कहते हैं, अपने घर पर करीब 25 कुत्ते, 20 बिल्लियां और लगभग 200 अन्य जानवरों (Dog News) की देखभाल करती हैं।
इसके आलावा स्थानीय निवासी भावना का कहना है कि इस आदेश से समाज में जागरूकता बढ़ेगी। लोग अब पालतू और आवारा कुत्तों को सड़कों पर छोड़ने के बजाय उनकी देखभाल और सुरक्षा पर ध्यान देंगे।
डॉग लवर सोहन ने कहा कि यह आदेश न केवल डॉग लवर्स के लिए राहतभरा है बल्कि पशु अधिकारों को लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी अहम कदम है।
Dog News: जानिए क्या है आदेश में संसोधन
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पकड़ कर डॉग शेल्टर में रखने के अपने 11 अगस्त के आदेश में शुक्रवार को संशोधन कर दिया है। संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को पकड़ कर उनका बंध्याकरण व टीकाकरण करने के बाद उन्हें छोड़ा जाएगा। लेकिन इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आक्रामक और रैबीज संक्रमित कुत्ते (Dog News) पकड़ने के बाद छोड़े नहीं जाएंगे यहां तक कि उन्हें डॉग शेल्टर में भी अलग रखा जाएगा।
नगरीय निकाय तत्काल प्रभाव से प्रत्येक वार्ड में आवारा कुत्तों को भोजन कराने के लिए एक निश्चित स्थान (फीडिंग प्वाइंट ) बनाएंगी। कोई भी संस्था या व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में कुत्तों (Dog News) को सड़क पर खाना नहीं खिलाएगा और जो व्यक्ति इस निर्देश का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्यवाही होगी। दूसरा संशोधन यह है कि पहला आदेश दिल्ली एनसीआर के लिए था। अब यह पूरे देश पर लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह संशोधित आदेश केवल कानूनी फैसला भर नहीं है, बल्कि यह आम लोगों को भी यह संदेश देता है कि इंसान और जानवर का रिश्ता करुणा और सह-अस्तित्व पर टिका है। वाराणसी सहित पूरे देश में पशुप्रेमियों ने इसे स्वागत योग्य कदम माना है।