Cough Syrup Case: वाराणसी में कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध साम्राज्य का जाल अब परिवार तक फैलता दिख रहा है। किंगपिन शुभम जायसवाल के पिता की गिरफ्तारी के बाद ईडी और एसआइटी ने उसके ससुराल वालों की संपत्ति और बैंक खातों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। सोनिया रोड स्थित अमर नगर कॉलोनी में जांच टीम (Cough Syrup Case) ने कई दौर की पूछताछ कर साली–साले समेत अन्य रिश्तेदारों के खातों और संपत्ति लेन-देन की जानकारी खंगाली है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अहम सुराग मिले हैं जिनकी विस्तृत जांच जरूरी मानी जा रही है।
बैंक खातों से लेकर जमीन-जायदाद तक जांच
शुभम के ससुराल पक्ष के नाम पर कीमती संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की जानकारी जुटाई जा रही है। ईडी को ऐसे लेन-देन के दस्तावेज मिले हैं जो संदिग्ध माने जा रहे हैं। रिश्तेदारों के नाम पर बनाई गई फर्मों (Cough Syrup Case) के जरिए कारोबार का विस्तार यूपी, बिहार, झारखंड, कोलकाता, बंगाल और यहां तक कि बांग्लादेश तक फैला।
Cough Syrup Case: साझेदारों और सफेद पोशों पर भी शिकंजा
जांच एजेंसियां अब शुभम के पार्टनर गौरव जायसवाल, विशाल मल्होत्रा, वरुण सिंह और अमित सिंह टाटा के करीबियों तक पहुंचने की तैयारी में हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ड्रग विभाग के पूर्व अधिकारी, बिल्डर, होटल कारोबारी और कई सफेदपोश इस नेटवर्क को संरक्षण देते रहे। शुभम के सीए विष्णु अग्रवाल के दफ्तर से कई फर्मों और बैंक खातों का खुलासा हुआ है।
रांची से वाराणसी तक फैला नेटवर्क
झारखंड के रांची में शैली ट्रेडर्स और न्यू वृद्धि फार्मा के जरिए शुभम और उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल ने एबाट कंपनी से बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त कफ सीरप (Cough Syrup Case) खरीदा। वाराणसी और आसपास के जिलों में 150 से अधिक स्टॉकिस्टों के जरिए यह कारोबार आगे बढ़ाया गया।
सोनभद्र जेल में बंद शुभम के पिता भोला प्रसाद को रिमांड पर लेकर एसआइटी पूछताछ की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि पिता–पुत्र की मिलीभगत से यह नेटवर्क वर्षों तक फलता-फूलता रहा। बता दें, यह मामला (Cough Syrup Case) अब सिर्फ एक ड्रग माफिया की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके पारिवारिक और कारोबारी रिश्तों की परतें भी खुल रही हैं। जांच एजेंसियों की नजर अब उन सभी पर है जिन्होंने इस काले कारोबार को संरक्षण दिया और इसे सीमाओं के पार तक फैलाया।

