Varanasi: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ शुक्रवार को वाराणसी में जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। साझा संस्कृति मंच के नेतृत्व में शास्त्री घाट (वरुणा पुल–कचहरी) से मजदूरों, किसानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रैली निकाली और एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया। इस आंदोलन में ग्रामीण इलाकों से पहुंचे सैकड़ों मजदूर, किसान, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
VB-G RAM G विधेयक मजदूर विरोधी
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए VB-G RAM G विधेयक को मजदूर-विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ तीखी नारेबाजी की। सभा (Varanasi) के दौरान विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया। इसके बाद रैली जिला मुख्यालय तक निकाली गई, जहां राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी जैसे कठिन दौर में मनरेगा ने लाखों परिवारों को भुखमरी और पलायन से बचाया। प्रस्तावित संशोधन इस अधिकार को कमजोर करने की साजिश है।
प्रदर्शनकारियों ने दी चेतावनी
वक्ताओं का आरोप था कि नए विधेयक के जरिए रोजगार की सार्वभौमिक गारंटी खत्म की जा रही है, बजट को सीमित किया जा रहा है और किन क्षेत्रों में योजना लागू होगी, इसका फैसला केंद्र की अधिसूचना पर निर्भर होगा। इससे न केवल पंचायतों की स्वायत्तता कमजोर होगी, बल्कि सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण भी बढ़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक व तेज किया जाएगा।

Varanasi: रैली में जमकर लगे नारे
जनसभा (Varanasi) के दौरान लोग हाथों में तख्तियां लेकर “मनरेगा में गांधी का नाम नहीं हटेगा”, “रोजगार गारंटी लागू करो” और “कॉर्पोरेट राज वापस जाओ” जैसे नारे लगाते नजर आए । प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल मजदूरी या रोजगार की नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को बचाने की है।
ज्ञापन में सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम यथावत रखने, VB-G RAM G विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने, अधिसूचना के जरिए क्षेत्रों को सीमित करने की व्यवस्था को खत्म करने, खेती के मौसम में 60 दिन के ब्लैकआउट पीरियड को समाप्त करने, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य न बनाने, मजदूरी का बोझ राज्यों पर न डालने और पंचायतों की स्वायत्तता बहाल करने जैसी मांगें प्रमुख रहीं।

