Varanasi: देश की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी, जहां गंगा की धारा और घाटों की शांति को आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है, अब भय और असुरक्षा का पर्याय बनती जा रही है। नए साल पर वायरल हुए दो खौफनाक वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि बनारस (Varanasi) के घाटों पर पर्यटकों का अनुभव अब सुरक्षित नहीं रह गया है।
दशाश्वमेध घाट पर नाव में हिंसा
पहला वीडियो शहर के सबसे प्रमुख दशाश्वमेध घाट का बताया जा रहा है। एक बड़ी नाव पर सवार दो गुटों के बीच मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। देखते ही देखते लात-घूंसे और लाठी-डंडे चलने लगे। नाव पर मौजूद महिलाएं और बच्चे चीखते-चिल्लाते नजर आए, जबकि कुछ लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते दिखे। इस अफरातफरी में एक युवक गंगा में गिरता भी दिखाई दिया। घाट से वीडियो बना रहे लोग भी हैरान रह गए और बचाने की गुहार लगाते रहे।
सामनेघाट पर चप्पू और लाठी से हमला
दूसरा वीडियो अस्सी घाट (Varanasi) के आगे सामनेघाट का है। यहां करीब दो दर्जन लोग नाव की चप्पू और लाठी-डंडों से एक-दूसरे पर हमला करते दिखे। बताया जाता है कि नाव लगाने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि लोग घाट पर दौड़ा-दौड़ा कर एक-दूसरे को पीटने लगे। घटना के बाद लंका पुलिस ने तीन नामजद और 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
तहरीर और आरोप
मदरवा निवासी गौतम साहनी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह अपने साथियों के साथ घाट पर सवारी का इंतजार कर रहे थे। तभी रामनगर का बबलू साहनी विवाद करने लगा। विरोध करने पर वह चला गया, लेकिन थोड़ी देर बाद कल्लू साहनी, मनोज साहनी समेत अन्य लोगों के साथ लौटकर हमला कर दिया।
पुलिस की सतर्कता पर उठे सवाल
इन घटनाओं ने वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता गुप्ता के साथ हुई घटना में भी पुलिस (Varanasi) की लापरवाही उजागर हुई थी। अंकिता का मोबाइल लुटेरों ने छीन लिया था, लेकिन रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अंततः अंकिता ने खुद तकनीकी कौशल से लुटेरों का पता लगाया।
जल पुलिस की भूमिका पर संदेह
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंगा (Varanasi) की लहरों पर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए तैनात रहने वाली जल पुलिस आखिर कहां थी। नावों के बीच सवारी बैठाने और वर्चस्व को लेकर अक्सर विवाद होते हैं, जिन्हें स्थानीय पुलिस नजरअंदाज करती रही है। वीडियो के आधार पर कार्रवाई का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन अंकिता गुप्ता मामले ने पहले ही इन दावों की पोल खोल दी थी।
गंगा किनारे की इन घटनाओं ने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छवि पर गहरा धब्बा लगा दिया है। पर्यटक अब यहां शांति और अध्यात्म की तलाश में नहीं, बल्कि असुरक्षा और भय का सामना कर रहे हैं। वायरल वीडियो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि बनारस के घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की साख दांव पर लग चुकी है।

