varanasi की पवित्र धरती पर 2023 में गंगा किनारे बनाई गई टेंट सिटी अब कानून की नजर में अवैध करार दी गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए दो कंपनियों पर कुल 34.40 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। यह फैसला न केवल पर्यावरणीय नियमों की अहमियत को रेखांकित करता है, बल्कि गंगा की पवित्रता और उसके पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक चेतावनी भी है।
बिना मंजूरी बनी टेंट सिटी
एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने साफ कहा कि प्रवेग कम्युनिकेशंस (इंडिया) लिमिटेड और निराण कंपनी ने बिना किसी वैध अनुमति के गंगा किनारे टेंट सिटी बसाई थी। यह कदम सीधे तौर पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन था। गंगा के किनारे 20 हेक्टेयर में प्रवेग ने 140 टेंट लगाए, जबकि निराण कंपनी ने 10 हेक्टेयर में 120 टेंट खड़े किए।
पर्यावरण को नुकसान और गंगा में प्रदूषण
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस टेंट सिटी (varanasi) से गंगा में प्रदूषण बढ़ा और जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा। गंगा जैसी संवेदनशील नदी के किनारे इस तरह का निर्माण न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन को भी बिगाड़ता है।
varanasi:जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर दोनों कंपनियों से 17.20 लाख रुपये प्रति कंपनी के हिसाब से जुर्माना वसूले। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों को सख्त आर्थिक दंड मिले।
भविष्य के लिए सख्त चेतावनी
फैसले में यह भी साफ किया गया कि भविष्य में गंगा (varanasi) या उसकी सहायक नदियों के किनारे किसी भी तरह की टेंट सिटी नहीं बनाई जाएगी। यह आदेश गंगा संरक्षण के लिए एक ठोस कदम है और यह संदेश देता है कि धार्मिक पर्यटन या व्यावसायिक गतिविधियों के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वाराणसी (varanasi) की गंगा किनारे बनी टेंट सिटी पर एनजीटी का यह फैसला पर्यावरणीय न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह न केवल गंगा की पवित्रता की रक्षा का संकल्प है, बल्कि उन सभी के लिए सबक भी है जो व्यावसायिक लाभ के लिए प्रकृति और नियमों की अनदेखी करते हैं। गंगा की धारा अब और अधिक सख्त निगरानी में होगी, ताकि उसकी निर्मलता और जीवनदायिनी शक्ति सुरक्षित रह सके।

