Varanasi: धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने खेल प्रेमियों के साथ-साथ संस्कृत प्रेमियों को भी हैरान कर दिया। यहां बटुकों ने गले में कंठी, माथे पर टीका-त्रिपुंड और धोती-कुर्ता धारण कर क्रिकेट खेला। खास बात यह रही कि पूरे मैच की कमेंट्री संस्कृत भाषा में की गई, जिसे सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

Varanasi: 82वें स्थापनोत्सव पर हुआ आयोजन
यह अनोखा क्रिकेट मैच दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 82वें स्थापनोत्सव के अवसर पर आयोजित किया गया। आयोजन स्थल जयनारायण इंटर कॉलेज, रामापुरा (Varanasi) रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग इस अद्भुत नज़ारे के साक्षी बने। संस्कृत के विद्वान बटुकों ने पारंपरिक वेशभूषा में मैदान पर उतरकर यह साबित कर दिया कि आधुनिक खेल और प्राचीन संस्कृति एक साथ चल सकती है।

चाणक्य वेश में नजर आए बटुक
मैदान पर उतरे बटुक चाणक्य के वेश में नजर आए। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी और गेंदबाजी की। चौके-छक्कों की गूंज के बीच जब संस्कृत में कमेंट्री होती रही, तो माहौल पूरी तरह अलग और बेहद जीवंत हो उठा। संस्कृत शब्दों में हर रन, हर विकेट और हर रोमांचक पल का वर्णन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

इस प्रतियोगिता (Varanasi) में शामिल बटुकों ने न केवल खेल कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि संस्कृत भाषा के प्रति अपनी गहरी आस्था और रुचि को भी सामने रखा। संस्कृत में कमेंट्री करने वाले वक्ताओं ने खेल के हर क्षण को इतने रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया कि दर्शकों को एक पल के लिए भी नजरें हटाने का मौका नहीं मिला।

आयोजकों का कहना था कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य केवल खेल को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा और भारतीय परंपराओं को जनमानस (Varanasi) से जोड़ना भी है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि संस्कृत कोई पुरानी या बोझिल भाषा नहीं, बल्कि आज भी जीवंत और प्रभावशाली माध्यम है।
काशी (Varanasi) में आयोजित यह अनोखा क्रिकेट मैच खेल, संस्कृति और संस्कृत के अद्भुत संगम का प्रतीक बन गया। बटुकों की प्रतिभा और आयोजन की मौलिकता ने यह साबित कर दिया कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। इस आयोजन ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का अवसर भी प्रदान किया।

