Varanasi: दालमण्डी में चल रहे चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित व्यापारी गुरुवार को कचहरी परिसर में एकत्रित हुए। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास एवं उचित मुआवजे की मांग की। वहीं जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने भी उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। व्यापारियों का कहना है कि चौड़ीकरण की जद में उनकी दशकों पुरानी पुश्तैनी दुकानें आ रही हैं, जिन पर उनका और उनके परिवारों का जीवन निर्भर है।
दुकान के भरोसे हैं परिवार का जीवन
ज्ञापन में व्यापारियों ने बताया कि दालमण्डी क्षेत्र (Varanasi) की अधिकांश दुकानें उनके पूर्वजों द्वारा स्थापित की गई थीं और पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से इन्हीं दुकानों के माध्यम से उनका व्यवसाय चल रहा है। इन दुकानों से होने वाली आय से ही परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, शादी-विवाह, इलाज और अन्य आवश्यक खर्च पूरे होते हैं।
नोटिस के बाद नहीं दिया गया समय
दालमंडी व्यापारी खालिद अली का कहना है कि हमें जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। आखिर हमलोग कहां जाएंगे। हमलोग दूकानदार है। मकान मालिक को मुआवजा मिल रहा है लेकिन हमारा क्या। प्रशासन की ओर से दुकानें खाली कराने और ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी करने के बाद हमें कोई टाइम नहीं दिया गया। अचानक आजीविका छिन जाने की आशंका ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है।
वहीं दालमंडी की एक अन्य व्यापारी व अधिवक्ता कायनात वारसी ने बताया कि मेरी खुद की तीन दूकान है जो ध्वस्तीकरण कार्रवाई (Varanasi) में जा रही है। सरकार ने प्रस्ताव ला दिया है। हम कहां जाएंगे। हमें उजाड़ा जा रहा है। हमने आज डिएम से मुलाकात की है उन्होंने आश्वासन भी दिया है। लेकिन हमें अब तक सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है और उसके अलावा कुछ नहीं हो रहा है।
Varanasi: विकास के नाम पर मिल रहा लॉलीपॉप
इसे लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता मंगलेश दुबे ने बताया कि जिस प्रकार से दालमंडी में विकास और जनसुविधा के नाम पर लोगों के माननीय अधिकारों की बलि चढ़ाई जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के स्तर पर लोगों को केवल प्रस्ताव और लॉलीपॉप थमाए जा रहे हैं, जिस तरह से दालमंडी (Varanasi) से लोगों को बेदर्दी से निकाला जा रहा है। उनके साथ जो व्यवहार किया जा रहा है। वह मानव अधिकार और भारतीय संविधान के खिलाफ है।
व्यापारियों ने स्पष्ट मांग की है कि किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई से पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए अथवा उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। उनका कहना है कि बिना पुनर्वास या मुआवजे के उनकी आजीविका का एकमात्र साधन समाप्त हो जाएगा।

