Madhya Pradesh के इंदौर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिंग रोड परियोजना के दौरान किसानों का जमीन अधिग्रहण में सैकड़ों किसानों ने विरोधप्रदर्शन किया। अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट को घेर लिया गया है। इस दौरान किसानों ने अपने गले में सम्मान मेडल और शील्ड टांगकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी किया। वहीं तेज धुप और गर्मी के कारण एक किसान बेहोश हो गया।

किसानों का कहना है कि एक इंच भी जमीन नहिओं देंगे। ये सब सिहंस्थ 2026 के लिए हो रहा है, जबकि चार सड़कें पहले से हैं। फिर भी किसानों की जमीन छिनी जा रही है। रिंग रोड (Madhya Pradesh) के दायरे में आने वाली जमीन उनकी आजीविका का मुख्य स्त्रोत है। अगर जमीन चली गई तो परिवार का भरण-पोषण का बड़ा संकट आजायेगा। परिवार भूखा मर जायेगा।
वहीं किसान गौतम बंटू गुर्जर का कहना है कि पूर्वी इलाके में पहले से ही तीन-चार कनेक्टिंग (Madhya Pradesh) रोड हैं। इनमें RI-2, RI-3 और बाईपास शामिल हैं। इस नई परियोजना के चलते 1,200 किसानों के जमीन पर असर पड़ रहा है। सरकार हमारी उपजाऊ जमीन छीनना चाहती है, जबकि यहां अच्छी मात्रा में फसलें पैदा होती हैं। जिससे मालवा-निमाड़ को फायदा होता है।
Madhya Pradesh: जमीन नहीं बचेगी तो सम्मान का क्या
इसके साथ ही किसानों (Madhya Pradesh) ने कहा कि खेती किसानों की आत्मा है, किसान पुरे देश के लोगों का पेट भरते हैं, इस तरह के जमीन अधिग्रहण किया जायेगा तो हम किसान कहाँ जायेंगे। कई किसान यहां प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसके लिए हम सम्मानित भी हो चुके हैं। जमीन नहीं बचेगी तो सम्मान का क्या करेंगे?
प्रदर्शनकारियों (Madhya Pradesh) का कहना है कि पूर्वी आउटर रिंग रोड परियोजना के तहत उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। मुआवजा दर, पुनर्वास और सर्वे प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्दबाजी में आगे बढ़ाई जा रही है। जब हमें सम्मानित किया गया था, तब हम विकास के सहभागी थे। आज वही किसान अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- 1 बाजार दर के अनुरूप उचित मुआवजा
- 2 सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता
- 3 पुनर्वास नीति स्पष्ट करना
- 4 आपत्तियों पर व्यक्तिगत सुनवाई
- 5 मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा।
- 6 महीने से किसानों से बातचीत चल रही- ADM
ADM रोशन राय ने बताया कि अलाइनमेंट बदलने और गाइडलाइन से ज्यादा मुआवजे की मांग है। पिछले छह महीने से किसानों से बातचीत चल रही है। जैसे वेस्टर्न रिंग रोड की समस्या हल हुई, वैसे ही इसे भी हल किया जा रहा है। मुद्दे यहां हल हो सकते हैं, उन्हें यहां सुलझाया जाएगा। सरकार को भेजने लायक हैं, उन्हें वहां भेजा जाएगा।

